Rail project in Rishikesh: ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना में गंगा के ऊपर बना पुल, अब छह की जगह ढाई घंटे में पूरा होगा सफर

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना में गंगा के ऊपर बने पुल का उद्घाटन रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) द्वारा किया गया है। यह पुल परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना में गंगा के ऊपर बने पुल का उद्घाटन रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) द्वारा किया गया है। यह पुल परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो गंगा नदी के ऊपर स्थित है और टिहरी जिले को पौड़ी जिले से जोड़ता है। इस पुल के निर्माण के बाद, ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक की यात्रा का समय लगभग छह घंटे से घटकर ढाई घंटे रह जाएगा। यह पुल गढ़वाल मंडल के जिलों को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने में सहायक होगा और सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। परियोजना में कुल 13 स्टेशन शामिल हैं, जिनमें ऋषिकेश के बीरभद्र और योगनगरी रेलवे स्टेशन प्रमुख हैं। आरवीएनएल ने मई से ट्रैक बिछाने का कार्य भी प्रारंभ कर दिया है। परियोजना में कुल 19 प्रमुख पुलों का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें से आठ पुलों का कार्य पूरा हो चुका है। गंगा के ऊपर बने इस पुल का मुख्य स्पान 125 मीटर है, जबकि सहायक स्पान 32 मीटर का है। यह पुल गंगा की सहायक नदियों पर बने अन्य पुलों से अलग है, जो इस परियोजना की विशेषता है। इसके साथ ही, रोड ब्रिज का निर्माण भी तेजी से किया जा रहा है, जिससे यात्रियों को स्टेशनों तक पहुंचने में आसानी होगी।
इस परियोजना का उद्देश्य गढ़वाल क्षेत्र को सुरक्षित, विश्वसनीय और हर मौसम में रेल संपर्क प्रदान करना है। यह क्षेत्र भूस्खलन और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित है, और इस परियोजना के माध्यम से कमजोर सड़क नेटवर्क पर निर्भरता को कम किया जाएगा। परियोजना में शामिल पांच जिले हैं: देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और चमोली। कुल 125 किलोमीटर लंबी इस परियोजना में लगभग 104 किलोमीटर (83 प्रतिशत) लंबाई सुरंगों की है, जिसमें 16 मुख्य सुरंगें और 12 निकास सुरंगें शामिल हैं। इसके अलावा, गहरी घाटियों और नदियों पर 19 प्रमुख और 31 छोटे पुल भी बनाए जा रहे हैं। कर्णप्रयाग रेलवे स्टेशन इस परियोजना का सबसे बड़ा स्टेशन होगा, जहां 26 लाइनें बिछाई जाएंगी और इसे टर्मिनस के रूप में विकसित किया जाएगा।
















