Monsoon Session: संसदीय कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ी

भारत की संसद का मौजूदा मॉनसून सत्र शुरुआत से ही हंगामे का शिकार बना हुआ है। इस सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच टकराव ने विधायी कार्यवाही को प्रभावित किया ह
भारत की संसद का मौजूदा मॉनसून सत्र शुरुआत से ही हंगामे का शिकार बना हुआ है। इस सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच टकराव ने विधायी कार्यवाही को प्रभावित किया है। केवल कुछ चुनिंदा विधेयकों पर ही चर्चा हो पाई है, जबकि कई महत्वपूर्ण विधेयक बिना किसी सार्थक बहस के पारित कर दिए गए हैं। अब तक केवल 'पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026' पर दोनों सदनों में विस्तृत चर्चा हुई है, जिसमें लोकसभा में लगभग 12 घंटे और राज्यसभा में 10 घंटे की बहस हुई। इसके अलावा, अधिकांश विधेयक बिना विस्तृत चर्चा के ही पारित हुए हैं। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही है। विपक्ष ने 'चंदा चोरी' के मुद्दे और छात्रों पर कथित लाठीचार्ज को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से जवाब की मांग की है।
बीजेपी सांसद डॉ. दिनेश शर्मा ने विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा कि संसद का कार्य संचालन विपक्ष के व्यवहार के कारण प्रभावित हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष का रवैया ऐसा प्रतीत होता है मानो वे संसद में नहीं, बल्कि किसी नाटक के मंच पर हों। डॉ. शर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष पंजाब और झारखंड की घटनाओं पर चर्चा करने से बच रहा है और केवल हंगामा कर संसद का समय बर्बाद कर रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि वह भी सदन की गरिमा को प्रभावित कर रहे हैं। वहीं, आम आदमी पार्टी के सांसद बलविंदर सिंह कंग ने सरकार को संसद की कार्यवाही बाधित करने के लिए जिम्मेदार ठहराया है।















