Organizational Changes in MP: दतिया उपचुनाव के बाद कांग्रेस और भाजपा में संगठनात्मक फेरबदल की तैयारी

भोपाल से मिली जानकारी के अनुसार, दतिया विधानसभा उपचुनाव के परिणामों के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में संगठनात्मक फेरबदल की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। कांग्र
भोपाल से मिली जानकारी के अनुसार, दतिया विधानसभा उपचुनाव के परिणामों के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में संगठनात्मक फेरबदल की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अपने-अपने संगठन की कमजोरियों को दूर करने के लिए सक्रिय हो गई हैं। कांग्रेस ने अपने संगठन की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया है कि वह आठ जिलाध्यक्षों को हटाने के साथ-साथ प्रदेश कार्यकारिणी के पुनर्गठन की योजना बना रही है। वहीं, भाजपा भी लगभग 12 जिलाध्यक्षों की जिम्मेदारियों में बदलाव कर सकती है। कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार, जिन जिलाध्यक्षों के प्रदर्शन को संतोषजनक नहीं पाया गया है, उनमें आगर मालवा, डिंडौरी, सिंगरौली, रायसेन, आलीराजपुर और ग्वालियर ग्रामीण जैसे जिले शामिल हैं। इन जिलाध्यक्षों को जल्द ही कार्यमुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इसके साथ ही, पार्टी प्रदेश कार्यकारिणी में भी व्यापक बदलाव की तैयारी कर रही है। 253 सदस्यीय कार्यकारिणी में ऐसे पदाधिकारियों को हटाया जाएगा, जो लंबे समय से संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय नहीं रहे हैं। उनकी जगह नए और सक्रिय चेहरों को मौका देने की योजना बनाई जा रही है। कांग्रेस नेतृत्व उन जिलाध्यक्षों की भूमिका भी बदलने पर विचार कर रहा है, जिन्हें आगामी विधानसभा चुनावों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभानी हैं। इनमें सतना के जिलाध्यक्ष सिद्धार्थ कुशवाह का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। दतिया उपचुनाव में उनकी सक्रिय भूमिका रही थी। इसके अलावा गुना के जिलाध्यक्ष एवं विधायक जयवर्धन सिंह और राजगढ़ के जिलाध्यक्ष प्रियव्रत सिंह को भी नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। डिंडौरी के जिलाध्यक्ष और विधायक ओमकार सिंह मरकाम भी चुनावी तैयारियों में व्यस्त हैं। वहीं, आलीराजपुर के जिलाध्यक्ष मुकेश पटेल ने पहले ही इस्तीफा दे दिया था, जिसे प्रदेश नेतृत्व ने स्वीकार नहीं किया। कांग्रेस ने भाजपा से मुकाबले के लिए 'संगठन सृजन अभियान' के तहत रायशुमारी कर जिलाध्यक्ष नियुक्त किए थे और उन्हें स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर भी दिया था। हालांकि, अखिल भारतीय कांग्रेस की समीक्षा में कुछ जिलों में संगठनात्मक कार्य अपेक्षा के अनुरूप नहीं पाए गए। इसी आधार पर अब बदलाव की तैयारी तेज हो गई है। अगले दो से तीन महीनों में पुनर्गठन की प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है।
भाजपा में भी संगठनात्मक समीक्षा के बाद कई जिलाध्यक्षों के प्रदर्शन पर सवाल उठाए गए हैं। पार्टी के सूत्रों के अनुसार, करीब 12 जिलाध्यक्षों की जिम्मेदारी बदली जा सकती है। दतिया जिला कार्यकारिणी भंग होने के बाद वहां के जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह पहले ही पद से हट चुके हैं। इसके अलावा बालाघाट के जिलाध्यक्ष रामकिशोर कावरे भी चर्चा में आए, जब उनके परिजनों का नाम कथित चावल घोटाले से जुड़ा। कुछ अन्य जिलों में बूथ सशक्तीकरण और संगठनात्मक कार्यक्रमों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं होने के कारण नेतृत्व बदलाव पर विचार कर रहा है। दोनों प्रमुख राजनीतिक दल अब आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन को अधिक सक्रिय, मजबूत और परिणाम आधारित बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अवधेश नायक को प्रदेश कांग्रेस महासचिव बनाया गया है। चुनाव के दौरान उनसे यह वादा किया गया था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने गुरुवार को उनकी नियुक्ति का आदेश जारी किया।
















