Political Dilemma for BJP: FCRA बिल के लिए परिसीमन बिल के 'समर्थकों' को करेगी नाराज?

संसद के गलियारों में बुधवार दोपहर सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की थी कि क्या बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार fcra संशोधन विधेयक इसी हफ्ते पेश करेगी या फिर उसे टाल देगी
संसद के गलियारों में बुधवार दोपहर सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की थी कि क्या बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार FCRA संशोधन विधेयक इसी हफ्ते पेश करेगी या फिर उसे टाल देगी। इसका मुख्य कारण है परिसीमन विधेयक, जो एक बड़ा और संवेदनशील मुद्दा है। FCRA बिल को पास कराने के लिए सरकार को केवल साधारण बहुमत की आवश्यकता है, जबकि परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के लिए अधिक समर्थन की जरूरत होगी। इस स्थिति ने सत्ताधारी दल के लिए एक कठिन परिस्थिति पैदा कर दी है, जिसे कैच-22 कहा जा सकता है। माना जा रहा है कि बीजेपी महत्वाकांक्षी परिसीमन बिल को पास कराने के लिए NDA से बाहर की पार्टियों से संपर्क कर रही है, लेकिन DMK और NCP-SP जैसी कई पार्टियां FCRA बिल के खिलाफ हैं। वहीं, YSRCP जैसी अन्य पार्टियां सावधानी से कदम उठा रही हैं। इंडिया टुडे ने विभिन्न पार्टियों के शीर्ष सूत्रों से बात की है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि FCRA बिल को लेकर उनके रुख में असहमति है।
दक्षिण की एक क्षेत्रीय पार्टी ने FCRA बिल के मौजूदा स्वरूप पर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं। उनका मानना है कि इस बिल के संशोधनों का असर उन संस्थानों पर पड़ेगा जो उनके कोर वोट बैंक से जुड़े हैं। पार्टी के एक नेता ने कहा, 'हम अभी भी सरकार के साथ बातचीत कर रहे हैं। अगर वे हमारे संशोधनों पर सहमत होते हैं, तो हम साथ आने पर विचार कर सकते हैं। वरना, हमें इसका विरोध करना होगा।' उन्होंने यह भी कहा कि वोटिंग से दूर रहना उनके लिए कोई विकल्प नहीं है। ईसाई और अल्पसंख्यक वोटर इस क्षेत्रीय पार्टी का मुख्य वोट बैंक हैं, और उन्हें डर है कि FCRA बिल का मौजूदा स्वरूप उनके मुख्य वोटरों के बीच नाराजगी पैदा करेगा।
















