High Court Ruling: पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, सड़क दुर्घटना मामले में 5 साल देरी से दाखिल चालान रद

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सड़क दुर्घटना के एक मामले में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए लगभग पांच साल बाद दाखिल किए गए चालान के आधार पर च
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सड़क दुर्घटना के एक मामले में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए लगभग पांच साल बाद दाखिल किए गए चालान के आधार पर चल रही सभी आपराधिक कार्यवाहियों को रद्द कर दिया है। जस्टिस मनीषा बत्रा की एकल पीठ ने इस मामले में स्पष्ट किया कि यदि कोई अपराध एक वर्ष की अवधि के भीतर संज्ञान लेने योग्य है और जांच एजेंसी देरी का कोई संतोषजनक कारण प्रस्तुत नहीं कर पाती है, तो मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेना कानूनन सही नहीं है। यह निर्णय उन मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल पेश करता है जहां जांच में अत्यधिक देरी होती है।
यह मामला पलवल जिले के होडल थाना में 12 मार्च 2018 को दर्ज की गई एफआईआर से संबंधित है। शिकायतकर्ता शेरू ने आरोप लगाया था कि 10 मार्च 2018 को वह अपनी पत्नी के साथ मोटरसाइकिल पर जा रहा था, जब एनएच-2 पर एक तेज गति से आ रही कार ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में दोनों घायल हो गए और उनकी बाइक भी क्षतिग्रस्त हो गई। एफआईआर में दुर्घटना करने वाली कार का पंजीकरण नंबर भी दर्ज किया गया था। जांच के दौरान याचिकाकर्ता वेद प्रकाश जोशी को 22 जुलाई 2023 को जांच में शामिल किया गया और औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। इसके बाद मोटर वाहन अधिनियम की धाराएं 192 और 196 भी जोड़ी गईं और 16 दिसंबर 2023 को चालान अदालत में पेश किया गया।
















