Supreme Court ruling: अमान्य ड्राइविंग लाइसेंस पर बीमा कंपनी नहीं देगी दुर्घटना मुआवजा

नई दिल्ली से डिजिटल डेस्क द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। इस निर्णय में स्पष्ट किया गय
नई दिल्ली से डिजिटल डेस्क द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। इस निर्णय में स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी सड़क दुर्घटना के समय वाहन चालक का ड्राइविंग लाइसेंस वैध नहीं है या उसका नवीनीकरण नहीं कराया गया है, तो बीमा कंपनी को दुर्घटना के मुआवजे के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। यह फैसला उन मामलों के लिए महत्वपूर्ण है जहां चालक या वाहन मालिक के पास वैध लाइसेंस नहीं होता है। अदालत ने इस मामले में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें बीमा कंपनी को मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों का पालन करना कितना आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति संजय करोल और एन. कोटिश्वर सिंह शामिल थे, ने इस मामले की सुनवाई के दौरान केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और सभी राज्यों के परिवहन विभागों को निर्देश दिया कि वे सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन के लिए एक व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाएं। अदालत ने यह भी कहा कि लोगों को वैध ड्राइविंग लाइसेंस के महत्व के बारे में जागरूक करने के लिए इंटरनेट मीडिया और अन्य संचार माध्यमों का उपयोग किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, अदालत ने ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने और उसके नवीनीकरण की प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
इस मामले की जड़ें वर्ष 2009 में हुई एक सड़क दुर्घटना में हैं, जिसमें एक कार ने दोपहिया वाहन को टक्कर मारी थी। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) ने पाया कि चालक ओमप्रकाश का लाइसेंस दुर्घटना से पहले ही समाप्त हो चुका था, और बाद में उसका नवीनीकरण कराया गया था। इस आधार पर, अधिकरण ने बीमा कंपनी को जिम्मेदार नहीं ठहराया। हालांकि, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने रिकार्ड की अनुपलब्धता का हवाला देते हुए बीमा कंपनी को 1.08 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था। इस निर्णय के तहत, सुप्रीम कोर्ट ने 'पे एंड रिकवर' सिद्धांत को लागू किया, जिसके अनुसार बीमा कंपनी पहले पीड़ितों को मुआवजा देगी और बाद में पूरी राशि वाहन मालिक और चालक से वसूल करेगी।
















