Terror Network Exposed in Punjab: पंजाब में आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश, सुरक्षा एजेंसियों पर उठे सवाल

सरकार का दावा है कि देश में आतंकवाद अब अपनी अंतिम सांसें ले रहा है, लेकिन हकीकत इससे अलग है। सीमा पार से आतंकवाद भारत की सुरक्षा के लिए आज भी एक बड़ी चुनौती बना
सरकार का दावा है कि देश में आतंकवाद अब अपनी अंतिम सांसें ले रहा है, लेकिन हकीकत इससे अलग है। सीमा पार से आतंकवाद भारत की सुरक्षा के लिए आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। विदेशी धरती से संचालित आतंकी संगठन घुसपैठ और हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए हमेशा मौके की तलाश में रहते हैं। आंतरिक सुरक्षा को कमजोर करने की उनकी साजिशें कई परतों में सामने आती हैं।
पंजाब पुलिस ने बीते मंगलवार को दो आतंकी तंत्रों का भंडाफोड़ कर चार नाबालिगों समेत नौ लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस का कहना है कि ये सभी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारे पर काम कर रहे थे। इसके साथ ही यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन को निशाना बनाने की साजिश रच रहे थे। हालांकि पुलिस इसे अपनी सफलता मान रही है, लेकिन इससे सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इन आतंकी तंत्रों की भनक पहले क्यों नहीं लग पाई।
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि आतंकियों के इस गिरोह ने पंजाब में कई जगह रेल पटरियों के पास निगरानी कैमरे लगाए थे। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इन कैमरों से ली गई तस्वीरें सीमा पार बैठे आकाओं को भेजी जाती थीं। हाल के दिनों में पंजाब में रेल पटरियों पर धमाके की कई घटनाएं हुई हैं, जिन्हें अब आतंकियों की इसी तरह की साजिश से जोड़ा जा रहा है।
चौंकाने वाली बात यह है कि आतंकी गिरोह के सदस्य कैमरे लगाकर रेल पटरियों की नियमित निगरानी कर रहे थे, जबकि पुलिस और खुफिया एजेंसियों को इसकी भनक नहीं लगी। पुलिस का दावा है कि पकड़े गए आतंकी हाल ही में विद्यार्थियों के प्रदर्शन के दौरान पेट्रोल बम बनाने का सामान लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर तक पहुंचे थे। इसे सुरक्षा में लापरवाही नहीं, तो और क्या कहा जाएगा? अगर प्रदर्शन के दौरान आतंकी अपने मंसूबे में सफल हो जाते, तो स्थिति कितनी गंभीर हो सकती थी, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।















