Wheat Procurement Scam: मध्य प्रदेश में MSP पर करोड़ों का फर्जीवाड़ा

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हाल ही में अपनी सरकार की पीठ थपथपाते हुए दावा किया था कि उनकी सरकार ने देश में सबसे अधिक गेहूं की खरीदी की है। सरकारी आं
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हाल ही में अपनी सरकार की पीठ थपथपाते हुए दावा किया था कि उनकी सरकार ने देश में सबसे अधिक गेहूं की खरीदी की है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष 13 लाख 41 हजार किसानों से एमएसपी पर लगभग 104 लाख 22 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया है। यह आंकड़ा पिछले 10 वर्षों में एमपी सरकार के रिकॉर्ड को तोड़ता है। लेकिन इस रिकॉर्ड तोड़ने वाली खरीदी की सच्चाई जानकर आप चौंक जाएंगे। दरअसल, एमएसपी पर गेहूं बेचने के लालच ने कई ठगों को किसान बनकर धोखाधड़ी करने पर मजबूर कर दिया है। इन फर्जी किसानों ने सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाया है। अब सरकार इस मामले की जांच की बात कर रही है और सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत की भी चर्चा हो रही है।
जानकारी के अनुसार, इस बड़े घोटाले को सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से अंजाम दिया गया। मध्य प्रदेश सरकार ने गेहूं की एमएसपी 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय की थी। इस दौरान 13 लाख 41 हजार किसानों ने गेहूं की बिक्री की। एमपी में गेहूं पंजीकरण की अंतिम तिथि 10 मार्च थी, लेकिन इसके ठीक पहले फर्जी किसानों ने पंजीकरण करवाया। 5 से 10 मार्च के बीच देर रात और सुबह के समय बड़ी संख्या में रजिस्ट्रेशन हुए। आरोप है कि असली किसानों और अनुसूचित जाति के किसानों के खसरा नंबरों का इस्तेमाल कर फर्जी नाम दर्ज किए गए। नियमों के अनुसार, पटवारी और तहसीलदारों को ऐसे पंजीकरण रद्द करने चाहिए थे, लेकिन कई मामलों में बिना जांच के सत्यापन कर दिया गया।
फर्जी किसानों ने सरकारी केंद्रों पर गेहूं बेचा और सरकारी भुगतान सीधे धोखाधड़ी करने वालों के बैंक खातों में पहुंच गया। इसका मुख्य उद्देश्य पड़ोसी राज्यों से सस्ता गेहूं खरीदकर उसे मध्य प्रदेश के सरकारी केंद्रों पर ऊंचे दामों पर बेचना था। राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने कहा कि इस घोटाले ने सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भिंड और राजगढ़ में इस फर्जीवाड़े में कई पटवारियों को निलंबित कर दिया गया है। भिंड में चार फर्जी किसानों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है। जिला प्रशासन ने भी ताबड़तोड़ गेहूं और उसके स्टॉक की जांच शुरू कर दी है। इस मामले में प्रशासन की मंशा किसानों के हितों की रक्षा करते हुए उपार्जन प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखना है।
















