Cyber Crime in Bihar: बिहार में साइबर क्राइम से भी बड़ा खतरा मानव तस्करी, डीजीपी बोले- हर जिले में बने एंटी ट्रैफिकिंग यूनिट

विश्व मानव तस्करी विरोधी दिवस के अवसर पर बिहार पुलिस मुख्यालय में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका विषय 'ट्रैप्ड बिहाइंड द स्कैम' रखा गया। इस कार्यक्
विश्व मानव तस्करी विरोधी दिवस के अवसर पर बिहार पुलिस मुख्यालय में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका विषय 'ट्रैप्ड बिहाइंड द स्कैम' रखा गया। इस कार्यक्रम में डीजीपी विनय कुमार ने मानव तस्करी की बढ़ती समस्या पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि बिहार में मानव तस्करी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और यह साइबर अपराध से तीन गुना अधिक हो चुके हैं। डीजीपी ने इस समस्या को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कमजोर वर्ग इकाई को निर्देश दिया कि सभी जिलों के महिला थानों में कम से कम दो विशेष एंटी ट्रैफिकिंग यूनिट का गठन किया जाए। यह कदम मानव तस्करी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
डीजीपी ने मानव तस्करी को 'साइलेंट क्राइम' करार दिया, जिसका असर पीड़ितों और उनके परिवारों पर दीर्घकालिक होता है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में गुमशुदा बच्चों के मामलों में वृद्धि हुई है, जो सामान्य अपहरण के मामलों में शामिल किए गए हैं। वर्ष 2020 में सामान्य अपहरण के लगभग 8 हजार मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 24 हजार से अधिक हो गई। उन्होंने बताया कि गुमशुदा बच्चों की बरामदगी दर लगभग 70 प्रतिशत है, लेकिन मानव तस्करी के शिकार बच्चों और महिलाओं की रिकवरी दर अभी भी चिंताजनक है।
















