Agricultural Revolution in Sant Kabir Nagar: नौकरी छोड़ गांव लौटे यशोवर्धन, 500 एकड़ में मक्का उगाकर बदली किसानों की तकदीर

संत कबीर नगर के तरयापार गांव के यशोवर्धन पांडे ने खेती को अपने जीवन का मिशन बना लिया है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत गोरखपुर के केंद्रीय विद्यालय से की और फिर
संत कबीर नगर के तरयापार गांव के यशोवर्धन पांडे ने खेती को अपने जीवन का मिशन बना लिया है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत गोरखपुर के केंद्रीय विद्यालय से की और फिर लखनऊ के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट से होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने पीवीआर सिनेमाहाल में नौकरी की, लेकिन उनका मन वहां नहीं लगा। उन्होंने नौकरी छोड़कर अपने गांव के किसानों के साथ मिलकर मक्का की खेती करने का निर्णय लिया। यशोवर्धन ने नाथनगर एग्री टेक्नोफेड फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी (एफपीओ) का गठन किया और किसानों को मक्का की खेती के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि पहले एक एकड़ मक्का की खेती पर 25 से 30 हजार रुपये की लागत आती थी, लेकिन एफपीओ के मॉडल को अपनाने से यह लागत घटकर 15 से 20 हजार रुपये हो गई। इससे किसानों की आय में भी वृद्धि हुई है।
यशोवर्धन ने किसानों को नई तकनीकों से अवगत कराया और उच्च गुणवत्ता वाले मक्का बीज उपलब्ध कराए। उन्होंने बताया कि पहले किसानों को मक्का की खेती में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब कंबाइन हार्वेस्टर की मदद से कटाई की समस्या हल हो गई है। कृषि विभाग के सहयोग से एफपीओ को बैच ड्रायर भी उपलब्ध कराया गया है, जिससे मक्का को वैज्ञानिक तरीके से सुखाया जा रहा है। इससे अफ्लाटॉक्सिन का जोखिम भी कम हुआ है। यशोवर्धन के प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई है, और उनके मक्का आधारित कार्यों पर दूरदर्शन ने विशेष कार्यक्रम भी तैयार किया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 जून 2026 को उन्हें सम्मानित किया, जबकि उपकार के निदेशक डॉ. संजय सिंह और कृषि विभाग के निदेशक पंकज त्रिपाठी ने उन्हें 30 जून 2026 को बेस्ट यंग फार्मर इन मार्केटिंग का अवार्ड दिया। यशोवर्धन का एफपीओ अब पूर्वांचल में मक्का उत्पादन, वैज्ञानिक कृषि और नवाचार आधारित खेती का सफल मॉडल बन चुका है। उनका लक्ष्य आने वाले वर्षों में हजारों किसानों को जोड़ना है। यशोवर्धन का मानना है कि यदि वैज्ञानिक तकनीक से खेती की जाए, तो यह केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलने का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकती है।











