Compassionate Appointment Case Delayed: इलाहाबाद HC का महत्वपूर्ण आदेश

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कानपुर नगर निगम में अनुकंपा नियुक्ति के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही याची के मामले को लटकाए जाने पर नाराजगी व्यक्त की है। न्यायमूर्ति मंजूरानी
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कानपुर नगर निगम में अनुकंपा नियुक्ति के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही याची के मामले को लटकाए जाने पर नाराजगी व्यक्त की है। न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान की एकलपीठ ने कहा है कि इस प्रकार की अनावश्यक देरी से पीड़ित परिवार को राहत देने का उद्देश्य ही विफल हो जाता है। अनुकंपा नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य मृत कर्मचारी के परिवार को तुरंत आर्थिक सहायता प्रदान करना है, जो कि सामान्य भर्ती प्रक्रिया से भिन्न है। यह एक मानवीय आधार पर दी जाने वाली सहायता है, जो परिवार की तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक होती है। ऐसे मामलों में समय पर निर्णय लेना अत्यंत महत्वपूर्ण है, ताकि प्रभावित परिवार को जल्द से जल्द सहायता मिल सके।
मुकदमे से जुड़े तथ्यों के अनुसार, याची कामायनी सिंह ने 2015 में नगर निगम कानपुर में अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था, लेकिन उसकी मांग को 24 जनवरी 2025 को खारिज कर दिया गया। इसके बाद उसने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां कोर्ट ने 12 फरवरी 2026 को नगर निगम को निर्देश दिया कि वह मामले में नए सिरे से निर्णय लें। हालांकि, इसके बावजूद अधिकारियों ने फिर से लगभग वही आदेश पारित किया, जिसे पहले ही कोर्ट रद कर चुका था। इस पर याची ने दोबारा हाई कोर्ट का रुख किया और न्यायमूर्ति ने नगर निगम के अधिकारियों को याची की नियुक्ति पर पांच अगस्त तक फैसला लेने का आदेश दिया। यदि तय समय में मामले का निस्तारण नहीं किया गया, तो संबंधित अधिकारियों को अदालत में व्यक्तिगत हलफनामे के साथ पेश होना होगा।
याची की मां की मृत्यु 13 मई 2013 को सेवाकाल में हुई थी। याची ने पहली बार 14 दिसंबर 2015 को अनुकंपा नियुक्ति का आवेदन दिया, लेकिन लगभग आठ साल बाद 17 जून 2023 को दोबारा आवेदन दिया गया, जिसे खारिज कर दिया गया। निगम के संबंधित विभाग ने यह कारण बताया कि 2021 में परिवार की परिभाषा में विवाहित बेटी को जोड़ा गया, जबकि मृत्यु 2013 में हुई थी। याची का तर्क है कि उसने 2020 में तलाक का मुकदमा किया और 15 मार्च 2024 को तलाक हुआ, इसलिए अब वह









