Bridge Collapse in Dehradun: 16 करोड़ का पुल, 16 दिन भी नहीं टिका!

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एक नया पुल, जिसे 16 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया था, केवल 16 दिन में ही पहली बारिश में धंस गया। नंदा की चौकी पुल की अप्रोच
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एक नया पुल, जिसे 16 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया था, केवल 16 दिन में ही पहली बारिश में धंस गया। नंदा की चौकी पुल की अप्रोच रोड में आई इस खामी ने निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बारिश के बाद पुल पर आवाजाही रोकनी पड़ी, जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। प्रशासन ने गड्ढे को भरकर पुल को फिर से चालू करने का दावा किया है, लेकिन PWD ने मामले की जांच के लिए तीन दिन का समय मांगा है। यह घटना उस समय हुई जब पिछले साल आई बाढ़ में पुराना पुल बह गया था और इसके बाद एक अस्थायी पुल का निर्माण किया गया था। अस्थायी पुल भी धंसने के बाद नए पुल को यातायात के लिए खोला गया था। अब, पहली बारिश में ही अप्रोच रोड का यह हाल देखकर स्थानीय लोग निराश हैं।
पुल के निर्माण की गुणवत्ता को लेकर स्थानीय लोगों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी अगर सड़क और पुल की स्थिति ऐसी है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि पुल नहीं धंसा है, बल्कि उसकी अप्रोच रोड में गड्ढा हुआ है। उन्होंने मिट्टी बहने को इस समस्या का कारण बताया और कहा कि इसे जल्द ही ठीक किया जाएगा। हालांकि, स्थानीय लोगों का सवाल है कि इतने बड़े बजट में बने पुल की अप्रोच रोड इतनी जल्दी खराब कैसे हो गई।
इस मामले में प्रशासन ने पुल को फिर से सुचारू करने का दावा किया है और गड्ढे को भरने का काम किया गया है। PWD सचिव ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं और तीन दिन के भीतर रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इस घटना ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि केवल ऊपर से भराव करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि एक स्थायी समाधान की आवश्यकता है। यह मामला न केवल स्थानीय प्रशासन के लिए चुनौती है, बल्कि यह दर्शाता है कि कैसे करोड़ों रुपये के खर्च के बावजूद बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।









