Junaid's Struggles: जंतर-मंतर पर 'कॉकरोचों' को खाना-पानी बांटने वाले जुनैद अब क्यों रो रहे?

जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के दौरान मोहम्मद जुनैद ने न केवल आंदोलन के लिए खाना-पानी का इंतजाम किया, बल्कि उन्होंने अपने साथियों के लिए भी हर संभव
जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के दौरान मोहम्मद जुनैद ने न केवल आंदोलन के लिए खाना-पानी का इंतजाम किया, बल्कि उन्होंने अपने साथियों के लिए भी हर संभव सहायता प्रदान की। लेकिन अब जब वह अकेले पड़ गए हैं, तो उनकी आंखों में आंसू हैं। जुनैद ने बताया कि कैसे वह अभिजीत दिपके के साथ मिलकर आंदोलन का हिस्सा बने और किस तरह उन्होंने अपने स्वास्थ्य के कारण आंदोलन से कुछ समय के लिए दूरी बनाई। 24 जुलाई की रात को एक कुत्ते के काटने के बाद उन्हें अस्पताल जाना पड़ा, लेकिन इस दौरान उन्हें एक अज्ञात गाड़ी में अगवा कर लिया गया। जुनैद ने बताया कि पुलिस ने उन्हें किसी बिल्डिंग में बंद रखा और उनसे कई सवाल पूछे। हालांकि, उन्होंने कहा कि पुलिस ने उनके साथ अच्छा व्यवहार किया। इस घटना के बाद उनके परिवार पर भी पुलिस की नजर पड़ी और उनके पिता और भाई से पूछताछ की गई। जुनैद ने स्पष्ट किया कि उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि उन्होंने केवल छात्रों की मदद की।
जुनैद ने बताया कि वह कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से पहले से जुड़े हुए थे और 6 जून को जंतर-मंतर पर पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि आंदोलन के दौरान पानी और खाने की कमी थी, इसलिए उन्होंने पहले पानी का इंतजाम किया और फिर धीरे-धीरे खाने की चीजें जुटाई। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कभी किसी से पैसे नहीं मांगे, बल्कि लोग स्वेच्छा से मदद करने के लिए आते थे। इस प्रकार, जंतर-मंतर पर खाने-पीने का इंतजाम एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं रह गया, बल्कि कई लोगों ने इसमें सहयोग किया। सिख भाई, हिंदू और किसान संगठनों के लोग भी इस आंदोलन में शामिल हुए और सभी ने मिलकर एकजुटता दिखाई।









