Liver Failure Causes: भारत में 30% मामलों का कारण हेपेटाइटिस-ए और ई

नई दिल्ली से प्राप्त जानकारी के अनुसार, भारत में तीव्र लिवर फेल्योर के लगभग 30 प्रतिशत मामलों के लिए हेपेटाइटिस-ए और हेपेटाइटिस-ई संक्रमण जिम्मेदार हैं। यह महत्
नई दिल्ली से प्राप्त जानकारी के अनुसार, भारत में तीव्र लिवर फेल्योर के लगभग 30 प्रतिशत मामलों के लिए हेपेटाइटिस-ए और हेपेटाइटिस-ई संक्रमण जिम्मेदार हैं। यह महत्वपूर्ण जानकारी एम्स के गैस्ट्रोएंटरोलाजी विभाग द्वारा किए गए एक अध्ययन में सामने आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि तीव्र लिवर फेल्योर एक गंभीर स्थिति है, जिसमें मृत्यु दर 50 प्रतिशत से अधिक हो सकती है। इस स्थिति से बचने के लिए सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता और समय पर जांच का महत्व बताया गया है। एम्स के गैस्ट्रोएंटरोलाजी विभाग के प्रमुख प्रो. प्रमोद गर्ग ने इस विषय पर चर्चा करते हुए बताया कि लिवर शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो पाचन, मेटाबालिज्म, विषैले पदार्थों को बाहर निकालने और प्रतिरक्षा से जुड़े 500 से अधिक कार्य करता है। लिवर में सूजन की स्थिति को हेपेटाइटिस कहा जाता है, जो कई बार शुरुआती दौर में बिना किसी लक्षण के बढ़ती रहती है और बाद में सिरोसिस, लिवर फेल्योर या लिवर कैंसर का कारण बन सकती है।
प्रो. शालिमार ने बताया कि तीव्र हेपेटाइटिस में पीलिया, उल्टी, जी मिचलाना और भूख कम लगने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। अधिकांश मरीज चार से छह सप्ताह में ठीक हो जाते हैं, लेकिन लंबे समय तक रहने वाला संक्रमण धीरे-धीरे लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। प्रो. प्रमोद गर्ग ने यह भी बताया कि हेपेटाइटिस-ए और ई दूषित भोजन और पानी के माध्यम से फैलते हैं, जबकि हेपेटाइटिस-बी और सी संक्रमित रक्त, असुरक्षित इंजेक्शन, असुरक्षित यौन संबंध और प्रसव के दौरान मां से बच्चे में फैल सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, दुनिया में लगभग 25.4 करोड़ लोग क्रानिक हेपेटाइटिस-बी और पांच करोड़ लोग हेपेटाइटिस-सी से संक्रमित हैं। भारत में चार करोड़ से अधिक लोग हेपेटाइटिस-बी और करीब 1.2 करोड़ लोग हेपेटाइटिस-सी से प्रभावित हैं।









