Maoists Surrender in Jharkhand: 16 माओवादियों के आत्मसमर्पण से सारंडा-कोल्हान में टूटा नेटवर्क

चाईबासा से सुधीर पांडेय की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को रांची में डीजीपी के समक्ष 16 माओवादियों ने एक साथ आत्मसमर्पण किया, जिसके परिणामस्वरूप कोल्हान और सारंडा
चाईबासा से सुधीर पांडेय की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को रांची में डीजीपी के समक्ष 16 माओवादियों ने एक साथ आत्मसमर्पण किया, जिसके परिणामस्वरूप कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में नक्सलियों का नेटवर्क ध्वस्त हो गया है। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में से 14 सारंडा और कोल्हान के जंगलों में सक्रिय थे। इस महत्वपूर्ण सफलता के बाद सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान अब संगठन के बचे हुए तीन शीर्ष हार्डकोर कमांडरों, मिसिर बेसरा, असीम मंडल और सालुका कायम पर केंद्रित हो गया है। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि माओवादी संगठन वर्तमान में अपने सबसे कमजोर दौर से गुजर रहा है। यदि ये तीन शीर्ष कमांडर गिरफ्तार होते हैं या आत्मसमर्पण करते हैं, तो कोल्हान प्रमंडल से माओवादी नेटवर्क का पूरी तरह से सफाया हो जाएगा।
असीम मंडल के दस्ते की स्थिति भी चिंताजनक है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, असीम मंडल का दस्ता तेजी से सिमट चुका है। उसके साथ अब केवल 11 सदस्य बचे हैं, जिनमें सचिन (उर्फ रामप्रसाद मार्डी), उसकी पत्नी, रवि सरदार और उसकी पत्नी शामिल हैं। सुरक्षा बलों को मिली सूचना के अनुसार, इस दस्ते ने अब पश्चिम बंगाल में शरण ली है। दूसरी ओर, मिसिर बेसरा का दस्ता भी कमजोर हुआ है। उसके साथ अब केवल चार सदस्य सक्रिय हैं, जिसमें मेहनत मोछू (उर्फ विभीषण) और रोहित शामिल हैं। हाल ही में, मिसिर के करीबी सहयोगी अजय महतो को गिरिडीह-बोकारो सीमा से गिरफ्तार किया गया, जो संगठन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। सालुका कायम फिलहाल पोड़ाहाट क्षेत्र में एक अलग नेटवर्क के साथ सक्रिय है, जिसमें राहत, रीता और पिंकी शामिल हैं। वह मुख्य रूप से अवैध वसूली और आर्थिक स्रोतों को बचाए रखने की जिम्मेदारी संभाल रहा है।









