Protesters' Stance: Resignation is the First Condition, Talks are Meaningless Without It: आंदोलनकारियों के तेवर: इस्तीफा पहली शर्त, इसके बिना वार्ता बेमानी

हाल ही में हुए एक वार्ता सत्र में, सौरव दास और आशुतोष रांका जैसे प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के सामने एक कठोर स्थिति रखी। इन दोनों ने बातचीत के दौ
हाल ही में हुए एक वार्ता सत्र में, सौरव दास और आशुतोष रांका जैसे प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के सामने एक कठोर स्थिति रखी। इन दोनों ने बातचीत के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा उनकी पहली और सबसे महत्वपूर्ण शर्त है। उनके अनुसार, इस शर्त के बिना वार्ता का कोई अर्थ नहीं है। यह जानकारी एक केंद्रीय मंत्री द्वारा दी गई, जिन्होंने इस वार्ता में भाग लिया था। सरकार ने 24 जुलाई को होने वाली वार्ता में सकारात्मक परिणाम की उम्मीद की थी, क्योंकि 20 जुलाई को हुई पहली मुलाकात के बाद सरकार ने सोनम वांगचुक तक अपनी पहुंच बनाने के लिए कई स्तरों पर कार्रवाई की थी। बातचीत के दौरान, प्रतिनिधियों ने आंतरिक सुरक्षा और बातचीत के लिए एक समिति के गठन पर सकारात्मक रुख अपनाया। जब उन्हें आंदोलन में असामाजिक तत्वों की घुसपैठ के बारे में बताया गया, तो उन्होंने ऐसे तत्वों के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन किया और यह भी कहा कि सीजेपी इस मामले में बाधा नहीं बनेगी। इसके अलावा, युवाओं ने सरकार और सीजेपी की समिति गठित करने की मांग पर जोर नहीं दिया, जब उन्हें समझाया गया कि यह उनकी प्राथमिकता नहीं है। वार्ता के दौरान, सीजेपी के वार्ताकारों को सरकार की कार्रवाई के संदर्भ में जानकारी दी गई, जिसमें उच्च शिक्षा सचिव को हटाने और एनटीए के 47 अधिकारियों को बर्खास्त करने की जानकारी शामिल थी। हालांकि, सीजेपी के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि उनकी मुख्य मांग शिक्षा मंत्री को पद से हटाने की है।
इस वार्ता में, दोनों वार्ताकार अपनी मांगों के इतर कुछ सुनने के लिए तैयार नहीं थे। जब प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई न करने पर सहमति बनी, तो उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि न केवल जंतर-मंतर पर, बल्कि भाजपा शासित किसी भी राज्य में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। 24 जुलाई की बैठक में, उन्होंने यह संदेश स्पष्ट कर दिया कि वांगचुक के अनशन तोड़ने या किसी अन्य प्रकार की कार्रवाई से कोई समाधान नहीं निकलेगा। इसके बाद, सरकार में शीर्ष स्तर पर विचार-विमर्श किया गया और इसके परिणामस्वरूप एक नई रणनीति तैयार की गई। यह स्पष्ट है कि प्रदर्शनकारियों की मांगें सरकार के लिए एक चुनौती बनी हुई हैं और इस मुद्दे पर आगे की बातचीत में कठिनाइयाँ आ सकती हैं। सरकार को अब यह समझना होगा कि वार्ता की सफलता के लिए क्या कदम उठाने होंगे, ताकि दोनों पक्षों के बीच एक संतोषजनक समाधान निकाला जा सके।









