Rainfall in Aligarh: बारिश ने बढ़ाया जर्जर भवनों पर खतरा, दो जगह गिरे मकान-छज्जे

सावन की शुरुआत से पहले मंगलवार को हुई मूसलधार बारिश ने अलिगढ़ शहर की जलनिकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। दो घंटे की लगातार बारिश ने शहर की प्रमुख सड़कों को तालाब म
सावन की शुरुआत से पहले मंगलवार को हुई मूसलधार बारिश ने अलिगढ़ शहर की जलनिकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। दो घंटे की लगातार बारिश ने शहर की प्रमुख सड़कों को तालाब में बदल दिया। नाले-नालियों के उफान के कारण कई घरों और दुकानों में पानी भर गया। इस बारिश ने जर्जर भवनों के खतरे को भी उजागर किया। देहलीगेट क्षेत्र के जंगलगढ़ी में एक मकान का छज्जा गिर गया, जबकि सासनीगेट के पक्की सराय में एक पुराना मकान धराशायी हो गया। इन घटनाओं में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन जर्जर भवनों के खिलाफ कार्रवाई का सवाल उठ खड़ा हुआ है। थाना देहलीगेट क्षेत्र के जंगलगढ़ी में राहत खान के मकान का छज्जा जर्जर होने के कारण गिर गया। संयोग से उस समय दुकानदार अंदर थे और सड़क पर आवाजाही कम थी, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। सीओ प्रथम संजीव कुमार ने बताया कि मकान के बाहर टेंट, दूध और पान-बीड़ी की तीन दुकानें किराए पर थीं। छज्जा जर्जर हालत में होने के कारण दोपहर के वक्त बारिश में भरभरा कर गिर गया। हालांकि उस समय ग्राहक नहीं थे और दुकानदार दुकान के अंदर थे। बारिश के कारण आवाजाही भी नहीं थी। सासनीगेट के पक्की सराय में गिरा जर्जर भवन खाली था। इस बारिश ने स्मार्ट सिटी के दावों की भी पोल खोल दी, क्योंकि करोड़ों रुपये की परियोजनाओं और जलनिकासी सुधार के दावों के बावजूद महज दो घंटे की बारिश में सड़कें तालाब में बदल गईं। जिन इलाकों में जलभराव रोकने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए, वहीं सबसे अधिक पानी भरा। नाले बारिश के पानी से लबालब हो गए, जिससे घरों और दुकानों में पानी घुसने से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। घंटों लोग पानी निकासी की जुगत में जुटे रहे। जगह-जगह जलभराव के कारण यातायात ठप हो गया। कई स्थानों पर वाहन रेंगते नजर आए, जबकि दोपहिया चालकों को सबसे अधिक दिक्कत हुई। जलभराव के कारण बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही भी प्रभावित रही। स्कूली बच्चे छुट्टी होने पर भीगते हुए घर पहुंचे और उन्हें रास्ते में जाम और जलभराव दोनों से जूझना पड़ा। जलनिकासी व्यवस्था कागजों में अधिक और जमीन पर कम दिखी। इस स्थिति में नगर निगम और स्मार्ट सिटी परियोजना के कार्यों पर भी लोगों ने सवाल उठाए।
मानसून की पहली तेज बरसात ने पूरे शहर को भिगो दिया। इस बारिश से शहर के रामघाट रोड, पीएसी, देवसैनी मोड़, क्वार्सी चौराहा, स्वर्ण जयंती नगर, एडीए कॉलोनी, केला नगर, मैरिस रोड, समद रोड, सेंटर प्वाइंट, मलखान नगर, दीवानी कचहरी, मीनाक्षी पुल, गुरुद्वारा रोड, छर्रा अड्डा, विकास नगर, एटा चुंगी, सराय हकीम, बारहद्वारी, रघुवीरपुरी, गूलर रोड, मैलरोज बाईपास, रसलगंज, खैर बाईपास रोड, भुजपुरा, एडीए शाहजमाल, ईदगाह, आगरा रोड, सासनीगेट समेत कई प्रमुख मार्गों पर पानी भर गया। पैदल निकलने वालों को घुटनों तक भरे पानी से होकर गुजरना पड़ा। नगर निगम के जवाहरनगर और मुख्य कार्यालय में भी पानी भर गया। मलखान नगर और जजेज कंपाउंड में अफसरों और न्यायिक अधिकारियों के आवास तक पानी पहुंच गया। शहरवासियों ने विकास कार्यों पर उठाए सवाल। झमाझम बारिश से शहर के तमाम इलाकों में जलभराव हुआ और लोगों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इससे नगर निगम की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल उठे। नागरिकों ने पूछा कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद शहर हर बरसात में क्यों डूब जाता है। जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही तय क्यों नहीं होती? स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत हुए विकास कार्यों के बावजूद जलभराव का स्थायी समाधान क्यों नहीं हुआ? स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष यही हालात बनते हैं, लेकिन समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं होती।









