Rare Mughal Sword Found: मध्य प्रदेश में मिली शाहजहां की शाही तलवार, 400 साल बाद सामने आई मुगलकाल की बेशकीमती निशानी

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करेरा में ज्ञान भारत मिशन के तहत पुरानी पांडुलिपियों के दस्तावेजीकरण के दौरान पुरातत्वविदों को एक अनमोल सोने की मूठ वाली तलवार मि
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करेरा में ज्ञान भारत मिशन के तहत पुरानी पांडुलिपियों के दस्तावेजीकरण के दौरान पुरातत्वविदों को एक अनमोल सोने की मूठ वाली तलवार मिली है। इस तलवार के बारे में दावा किया गया है कि यह मुगल सम्राट शाहजहां ने करेरा किले के सेनापति सैयद सालार को शाही सम्मान के रूप में भेंट की थी। तलवार पर फारसी भाषा में अंकित शिलालेख से इसकी प्रामाणिकता की पुष्टि होती है। यह तलवार सैयद सालार की नौवीं पीढ़ी की वंशज इत्रत जैदी के निजी संग्रह में सुरक्षित थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तलवार मुगलकालीन हथियारों में से एक दुर्लभ उदाहरण हो सकती है, जो आज भी सुरक्षित है।
इस खोज की सबसे बड़ी विशेषता तलवार पर सोने से उकेरा गया फारसी शिलालेख है, जिसमें लिखा है कि शाहजहां ने इसे सैयद सालार को भेंट किया था। शिलालेख में अंकित 'शमशीर आलेमानी बिन्ते शाहजहां बादशाह' का अर्थ है कि सम्राट ने इसे अपनी पुत्री मानकर सम्मानस्वरूप सौंपा। यह तलवार न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसकी डिजाइन और निर्माण भी इसे खास बनाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, तलवार की हल्की घुमावदार ब्लेड, सोने की जड़ाई और अलंकरण इसे शाहजहां की निजी तलवारों से मिलती-जुलती बनाते हैं।
इससे पहले, 2007 में सोथबीज़ की नीलामी में एक ऐसी ही तलवार प्रदर्शित की गई थी, जिसकी कीमत लगभग 717,800 डॉलर थी। वर्तमान में शाहजहां की निजी तलवार दोहा के इस्लामी कला संग्रहालय में सुरक्षित है, जिसमें छत्र, कमल और खसखस के अलंकरण बने हैं। इसका समय इस्लामी कैलेंडर के 1047 हिजरी (1637-1638 ईस्वी) का माना जाता है। करेरा में मिली इस तलवार की खोज इतिहास के कई नए पहलुओं को उजागर कर सकती है और शोध का आधार बन सकती है। यह खोज न केवल मध्य प्रदेश के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक उपलब्धि है।









