RSS addresses issues in Ayodhya: छात्र आंदोलन के बीच अयोध्या के कील-कांटे दुरुस्त करने में जुटा RSS

राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी ने संघ परिवार को गंभीर चिंतन के लिए मजबूर कर दिया है। इस घटना ने न केवल संगठन की छवि को धूमिल किया है, बल्कि यह भी सवाल उठाया है कि
राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी ने संघ परिवार को गंभीर चिंतन के लिए मजबूर कर दिया है। इस घटना ने न केवल संगठन की छवि को धूमिल किया है, बल्कि यह भी सवाल उठाया है कि आखिरकार वह कौन सी गलतियाँ थीं जिनके कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। अब आरएसएस के भीतर इस मुद्दे पर गहन चर्चा चल रही है कि जिस आंदोलन ने भाजपा को सत्ता में लाने में मदद की, उस राम मंदिर के निर्माण में संघ परिवार की चूक क्या थी। इस संदर्भ में, संघ ने यह स्वीकार किया है कि ट्रस्ट की ओर से संवाद की कमी और पारदर्शिता का अभाव इस स्थिति का मुख्य कारण है। संघ के पदाधिकारियों ने लखनऊ में अनौपचारिक बातचीत के दौरान माना कि जब ट्रस्ट ने खुद चंदा चोरी की घटना को उजागर किया, तो उसे पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बजाय खुद को पुलिस की भूमिका में नहीं आना चाहिए था। इससे समाज में गलत संदेश नहीं जाता और स्थिति और भी बिगड़ती नहीं।
अब आरएसएस ने मंदिर, ट्रस्ट और हिंदू समाज में फैली आशंकाओं को दूर करने के लिए संवाद बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। संघ ने सबसे पहले साधु संतों के बीच संवाद को बढ़ावा देने की पहल की है, खासकर उन संतों के साथ जो ट्रस्ट के कामकाज से नाराज थे। लगभग एक महीने की मेहनत के बाद, संघ ने अयोध्या के सभी प्रमुख संतों को ट्रस्ट की दूसरी बैठक में शामिल करने में सफलता प्राप्त की। इस बैठक में नई धार्मिक समिति का गठन किया गया, जिसमें अयोध्या के साधु संतों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अब नाराज साधु संत संघ और सरकार के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं, जिससे स्थिति में सुधार की उम्मीद की जा रही है।









