Strengthening DBT System: डीबीटी व्यवस्था होगी मजबूत, सात दिन में होंगे लिंक लाभार्थियों के बैंक खाते

देहरागोपीपुर (कांगड़ा)। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए एमएमएपी पोर्टल पर चि
देहरागोपीपुर (कांगड़ा)। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए एमएमएपी पोर्टल पर चिह्नित लाभार्थियों के बैंक खातों को आधार से लिंक करने की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। विभाग ने सभी उपायुक्तों को पत्र भेजकर निर्देश दिए हैं कि वे सात दिन के भीतर आधार-सक्षम बैंक खातों के सत्यापन का कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूरा करें। इस अभियान की जिम्मेदारी संबंधित खंड विकास अधिकारियों (बीडीओ) और पंचायत सचिवों को सौंपी गई है। पंचायत सचिवों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि वे केवल उन्हीं बैंक खातों को पोर्टल पर स्वीकृत करें जो लाभार्थी के आधार कार्ड से जुड़े हों और डीबीटी सेवाओं के लिए सक्रिय हों। सत्यापन प्रक्रिया के दौरान लाभार्थी का नाम, आधार संख्या, खाते का स्वामित्व और एमएमएपी फेज-2 सर्वे का सही विवरण जांचना अनिवार्य होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि लाभार्थियों के विवरण या जन्मतिथि में कोई त्रुटि पाई जाती है, तो उसे प्राथमिकता के आधार पर ठीक किया जाएगा। जिनकी ई-केवाईसी लंबित है, उनकी प्रक्रिया ई-परिवार पोर्टल के माध्यम से पूरी कराई जाएगी। इसके अलावा, जिन पात्र लाभार्थियों के पास आधार-सक्षम बैंक खाते नहीं हैं, उनके खाते संबंधित बैंकों के सहयोग से जल्द खुलवाए जाएंगे।
ग्रामीण विकास विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि किसी पंचायत सचिव या जिम्मेदार अधिकारी ने फर्जी या गलत बैंक खातों को मंजूरी दी या सत्यापन में लापरवाही बरती, तो उनके खिलाफ सेवा नियमों के तहत सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस प्रक्रिया की रियल-टाइम निगरानी के लिए एक विशेष मॉनिटरिंग डैशबोर्ड भी तैयार किया जा रहा है। परागपुर की बीडीओ मीना शर्मा ने विभागीय निर्देश मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि यह कदम डीबीटी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए उठाया गया है, जिससे लाभार्थियों को समय पर और सही तरीके से सहायता मिल सके। विभाग का लक्ष्य है कि सभी लाभार्थियों के बैंक खाते सही तरीके से लिंक हो जाएं ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। यह प्रक्रिया न केवल पारदर्शिता को बढ़ाएगी, बल्कि लाभार्थियों के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ उठाना भी आसान बनाएगी।









