Student Protests in India: यूपी में छात्र आंदोलन का उबाल क्यों नहीं आया

हाल ही में भारत के विभिन्न हिस्सों में कॉकरोच जनता पार्टी और कई छात्र संगठनों के बीच प्रोटेस्ट की लहर देखी गई। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्रों
हाल ही में भारत के विभिन्न हिस्सों में कॉकरोच जनता पार्टी और कई छात्र संगठनों के बीच प्रोटेस्ट की लहर देखी गई। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्रों ने सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। नीट पेपर लीक के खिलाफ छात्रों की एकता ने सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद छात्रों ने अपने आंदोलन को समाप्त कर दिया। इस छात्र आंदोलन ने मीडिया और सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियां बटोरीं। दिल्ली के जंतर-मंतर, मुंबई के शिवाजी गार्डन, कोलकाता और पटना जैसे शहरों में भी जोरदार प्रदर्शन हुए। लेकिन इस बीच एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। जब दिल्ली, बिहार और बंगाल जैसे राज्यों में छात्र आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया, तब उत्तर प्रदेश में स्थिति पूरी तरह से शांत रही। यहां केवल सीमित विरोध प्रदर्शन हुए। दिल्ली के नजदीक होने के बावजूद, यूपी में कहीं भी पत्थरबाजी या पुलिस लाठीचार्ज की घटना नहीं हुई। यह सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि यूपी में शांति बनी रही जबकि अन्य राज्यों में उथल-पुथल मची रही।
बिहार और बंगाल में प्रदर्शनकारियों ने हिंसक रूप धारण कर लिया। पटना, कटिहार, सिवान और मोतिहारी जैसे शहरों में हालात बेकाबू हो गए। कई स्थानों पर पुलिस को भीड़ पर काबू पाने के लिए हवाई फायरिंग करनी पड़ी। प्रदर्शन के दौरान सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया और सड़कों पर भारी हंगामा हुआ। बंगाल में भी प्रदर्शन के दौरान जमकर बवाल हुआ। लेकिन सोमवार रात को दोनों राज्यों की सरकारों ने एक बड़ा फैसला लेते हुए आंदोलनकारी छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस ले लिए। यह कदम केंद्र सरकार के दखल के बाद उठाया गया, जिससे दोनों राज्यों की सरकारों की किरकिरी हुई। इस सबके बीच उत्तर प्रदेश में शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन हुए। छात्रों ने अपनी मांगें रखीं, लेकिन सब कुछ कानून के दायरे में रहा। न तो असामाजिक तत्वों ने हिंसा की और न ही पुलिस को बल प्रयोग की आवश्यकता पड़ी। यूपी पुलिस ने कहीं भी लाठीचार्ज नहीं किया।









