Terror Module Arrests in Delhi: पाक-आईएसआई समर्थित टेरर मॉड्यूल के दो और गुर्गे दिल्ली में गिरफ्तार, विदेशी हथियार बरामद

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पाक-आईएसआई समर्थित एक टेरर मॉड्यूल और अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी में शामिल शाहबाज अंसारी गिरोह के
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पाक-आईएसआई समर्थित एक टेरर मॉड्यूल और अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी में शामिल शाहबाज अंसारी गिरोह के दो और सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान सीलमपुर के महफूज अली उर्फ बाबी उर्फ कबूतर और जौनपुर के मोहम्मद अहमद के रूप में हुई है। इन दोनों के कब्जे से एक सब-मशीन गन, तीन पिस्टल और 82 कारतूस बरामद हुए हैं। इस गिरोह पर पहले से ही यूएपीए एक्ट की धाराएं लगाई जा चुकी हैं और अब तक इस माड्यूल के 16 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पहले गिरफ्तार आरोपितों के पास से विदेश में बनी 28 आधुनिक पिस्टल और 281 कारतूस बरामद हुए थे, जो इस गिरोह की आपराधिक गतिविधियों की गंभीरता को दर्शाते हैं। क्राइम ब्रांच के विशेष पुलिस आयुक्त एचजीएस धालीवाल ने बताया कि दोनों आरोपितों को गुप्त सूचना के आधार पर एसीपी संजय कुमार नागपाल की देखरेख में गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में पता चला कि महफूज ने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की और 1998 में स्कूल छोड़ने के बाद अपने चाचा की ताला बनाने की फैक्ट्री में काम किया। धीरे-धीरे वह अपराध की दुनिया में शामिल हो गया और उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सक्रिय कुख्यात अपराधियों के साथ जुड़ गया। महफूज का आपराधिक इतिहास भी काफी लंबा है, जिसमें कई हत्याओं और गैंगवारों में शामिल होने के मामले शामिल हैं। वह जेल में बंद गैंग्स्टर हाशिम बाबा के साथ करीबी संबंध रखता था और उसकी आपराधिक गतिविधियों में मदद करता था। 2021 में उसने उन शूटर्स को पंजाब पहुंचाने में मदद की, जिन्होंने पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या की। इसके बाद उसने उनके मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को नष्ट करने का प्रयास किया। महफूज ने बताया कि वह सलीम पिस्टल के नेतृत्व वाले एक अंतरराष्ट्रीय अवैध हथियार तस्करी गिरोह का सक्रिय सदस्य है, जो पाकिस्तान से आधुनिक विदेशी हथियार मंगवाता था। ये हथियार खास तौर पर बनाई गई वेल्डिंग मशीनों में छिपाकर एयर कार्गो के जरिए काठमांडू भेजे जाते थे। नेपाल पहुंचने के बाद इन हथियारों की भारत में तस्करी की जाती थी। महफूज ने स्वीकार किया कि वह इन खेपों को लेता था और उन्हें दिल्ली में सुरक्षित स्थानों पर रखता था। वहीं, गिरफ्तार आरोपित मोहम्मद अहमद ने 10वीं तक पढ़ाई की और 2010 में पढ़ाई छोड़ने के बाद मोबाइल व कंप्यूटर की दुकानों पर काम किया। जौनपुर लौटने के बाद वह आपराधिक तत्वों के संपर्क में आया और 2013 में अवैध हथियार तस्कर अमित यादव से जुड़ गया। उसके बाद से वह कई आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा है। पिछले एक वर्ष में उसने 15 से 20 विदेशी पिस्टल और 50 से 60 कारतूस अपराधियों तक पहुंचाए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस नेटवर्क का इस्तेमाल भारत में आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया जाना था।









