The Story Behind Irfan: इरफान को 'इरफान' बनाने वाले की कहानी

दिल्ली की सावदा जेजे पुनर्वास कॉलोनी में रहने वाले मोहम्मद इरफान का नाम अब हर तरफ गूंज रहा है। हाल ही में जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान उनकी बातचीत ने उ
दिल्ली की सावदा जेजे पुनर्वास कॉलोनी में रहने वाले मोहम्मद इरफान का नाम अब हर तरफ गूंज रहा है। हाल ही में जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान उनकी बातचीत ने उन्हें सोशल मीडिया का चर्चित चेहरा बना दिया है। इरफान की मां की आंखों में आंसू आ जाते हैं जब वह कहती हैं, "हमने बेटे को देश को दे दिया है।" उनके पिता, जो 77 वर्ष के हैं, मुस्कुराते हुए कहते हैं कि उन्हें अपने बेटे की सफलता पर गर्व है। इरफान ने अपनी जिंदगी के कई बड़े फैसले परिवार की भलाई के लिए किए हैं, यहां तक कि उन्होंने अपनी सगाई भी तोड़ दी ताकि वह अपने छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारियों को पहले पूरा कर सकें। इरफान की मां बताती हैं कि जब उनकी शादी तय की गई थी, तब इरफान ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह पहले अपने भाई-बहनों की शादी कराना चाहते हैं। परिवार ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन इरफान ने अपने फैसले पर अडिग रहकर सगाई को तोड़ दिया। अब परिवार छोटे बेटे की शादी कर चुका है और दोनों बेटियों की जिम्मेदारी पूरी करने की तैयारी कर रहा है। इरफान की मां का कहना है कि उनका बेटा हमेशा परिवार की जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देता है।
इरफान की मां कहती हैं कि पहले वह उन्हें बाहर जाने से मना करती थीं, लेकिन अब उन्होंने उन्हें देश को समर्पित कर दिया है। उनका कहना है कि उन्हें अपने लिए कुछ नहीं चाहिए, बस देश में इंसाफ की आवश्यकता है। इरफान के पिता, जो अब कम सुन पाते हैं, अपने बेटे के नाम सुनकर मुस्कुराते हैं और कहते हैं कि उन्होंने कभी इरफान को डांटा नहीं, बल्कि हमेशा यही कहा कि वह मेहनत करें। इरफान का परिवार आर्थिक रूप से मजबूत नहीं है, लेकिन उन्होंने हर तरह का काम किया है, जैसे फल बेचना, माली का काम करना, और झुग्गियां बनाना। जब झुग्गियां टूट गईं, तब परिवार को गहने तक बेचने पड़े। आज, इरफान का परिवार बर्फ बेचकर अपनी रोजी-रोटी चला रहा है। उनकी मां का कहना है कि मुश्किलों के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों को हमेशा सही रास्ता अपनाने की शिक्षा दी है।









