Electricity Rates Increase in Uttarakhand: अगस्त माह से महंगी होगी बिजली, उपभोक्ताओं पर पड़ेगा अतिरिक्त भार

उत्तराखंड में अगस्त माह से बिजली की दरों में वृद्धि होने जा रही है, जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल)
उत्तराखंड में अगस्त माह से बिजली की दरों में वृद्धि होने जा रही है, जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने अगस्त 2026 के लिए लागू होने वाले फ्यूल एंड पावर परचेज कास्ट एडजस्टमेंट (एफपीपीसीए) सरचार्ज की दरें जारी की हैं। इस नए आदेश के तहत सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं को, जिसमें घरेलू, व्यावसायिक, औद्योगिक, कृषि, सरकारी संस्थान, रेलवे ट्रैक्शन, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन और अस्थायी कनेक्शन शामिल हैं, अपने बिजली बिल में अतिरिक्त राशि का भुगतान करना होगा। यह बदलाव उपभोक्ताओं के लिए एक नई चुनौती के रूप में सामने आया है, क्योंकि इससे उनकी मासिक बिजली लागत में वृद्धि होगी।
जारी आदेश के अनुसार, मीटरयुक्त घरेलू उपभोक्ताओं पर 14 पैसे प्रति यूनिट का फ्यूल एंड पावर परचेज कास्ट एडजस्टमेंट सरचार्ज लगाया गया है, जबकि लाइफलाइन उपभोक्ताओं के लिए यह दर 5 पैसे प्रति यूनिट निर्धारित की गई है। इसके अलावा, गैर-घरेलू (व्यावसायिक) उपभोक्ताओं को 20 पैसे प्रति यूनिट का अतिरिक्त भुगतान करना होगा। सरकारी सार्वजनिक उपयोगिता संस्थानों पर 19 पैसे प्रति केवीएएच, निजी ट्यूबवेल एवं पंपिंग सेट पर 6 पैसे प्रति यूनिट और कृषि गतिविधियों में 9 से 10 पैसे तक का सरचार्ज लागू किया गया है। औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए भी यह सरचार्ज अलग-अलग दरों पर लागू किया जाएगा, जिसमें एलटी उद्योगों पर 18 पैसे प्रति यूनिट और एचटी उद्योगों पर 18 पैसे प्रति केवीएएच का अतिरिक्त भार पड़ेगा।
मिक्स्ड लोड श्रेणी के उपभोक्ताओं पर 18 पैसे प्रति केवीएएच, रेलवे ट्रैक्शन पर 17 पैसे प्रति केवीएएच, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशनों पर 17 पैसे प्रति यूनिट और अस्थायी निर्माण कार्यों के बिजली कनेक्शनों पर 21 पैसे प्रति केवीएएच का सरचार्ज लगाया गया है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि एफपीपीसीए एक ऐसी व्यवस्था है जिसके तहत ईंधन और बिजली खरीद की लागत में हुए बदलाव का समायोजन उपभोक्ताओं के बिजली बिल में किया जाता है। यह मूल बिजली टैरिफ में वृद्धि नहीं है, बल्कि एक नियामकीय प्रावधान के तहत लगाया जाने वाला अतिरिक्त शुल्क है। फिर भी, इससे अगस्त माह की बिजली खपत पर आने वाला बिल पहले की तुलना में अधिक होगा, जिससे उपभोक्ताओं को अपनी वित्तीय योजना में बदलाव करना पड़ सकता है।









