Una News: बरसात में सब्जियों के दाम बढ़ने से रसोई का बजट बिगड़ा

नंदपुर (ऊना)। इस वर्ष बरसात के मौसम में सब्जियों की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। रोजमर्रा की जरूरत की सब्जियां अब
नंदपुर (ऊना)। इस वर्ष बरसात के मौसम में सब्जियों की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। रोजमर्रा की जरूरत की सब्जियां अब गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। महंगाई के इस दौर में सब्जियों की कीमतों में आए उछाल ने खासकर गृहिणियों के घरेलू बजट पर गहरा असर डाला है। महिलाएं इस बात की शिकायत कर रही हैं कि सीमित आय में घर का खर्च चलाना बेहद मुश्किल हो गया है। बाजार में टमाटर की कीमत 60 से 70 रुपये प्रति किलो, शिमला मिर्च 120 रुपये प्रति किलो, भिंडी और बैंगन जैसी मौसमी सब्जियां 60 रुपये प्रति किलो तक बिक रही हैं। प्याज भी 40 से 45 रुपये प्रति किलो के भाव से बेचा जा रहा है। ऐसे में कई परिवार अब केवल जरूरत के अनुसार ही सब्जियां खरीदने को मजबूर हो गए हैं, जबकि पहले वे एक साथ कई प्रकार की सब्जियां खरीदते थे। सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि बरसात के कारण फसलों को नुकसान, मंडियों में कम आवक और परिवहन लागत बढ़ने से खुदरा बाजार में सब्जियों के दाम में वृद्धि हुई है। यदि स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
सब्जियों के लगातार बढ़ते दामों ने रसोई का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। महंगाई को देखते हुए अब जरूरत के हिसाब से ही सब्जियां खरीदनी पड़ रही हैं। रजना देवी, जो नंदपुर की निवासी हैं, ने बताया कि बरसात के मौसम में हर साल सब्जियों के दाम बढ़ते हैं, लेकिन इस बार दाम इतने बढ़ गए हैं कि गरीब परिवारों के लिए रसोई चलाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि अब अधिकतर लोग सब्जियों के दाम सुनकर खरीदारी करने से कतराने लगे हैं। इस स्थिति ने न केवल गरीबों को बल्कि मध्यम वर्ग के लोगों को भी प्रभावित किया है।









