Yadav Singh Case: यादव सिंह प्रकरण में ओएसडी ने जांच से किया इनकार

नोएडा में अंडरग्राउंड केबलिंग घोटाले के मामले में नया मोड़ सामने आया है। कार्मिक ओएसडी अशोक कुमार ने इस प्रकरण की जांच करने से साफ इनकार कर दिया है। उनका कहना ह
नोएडा में अंडरग्राउंड केबलिंग घोटाले के मामले में नया मोड़ सामने आया है। कार्मिक ओएसडी अशोक कुमार ने इस प्रकरण की जांच करने से साफ इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि जिन अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होनी है, वे सभी शीर्ष स्तर के अधिकारी हैं और निचले स्तर का अधिकारी इस मामले की जांच नहीं कर सकता। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब यह पता चला कि नोएडा प्राधिकरण के चार अधिकारियों को चार्जशीट किया जाना था, जिनमें आरपी सिंह, निजामुद्दीन, प्रमोद और रामेंद्र शामिल हैं। इन अधिकारियों के खिलाफ शासन के बार-बार निर्देशों के बावजूद प्राधिकरण ने चार्जशीट नहीं भेजी। फरवरी में शासन ने इस मामले में कड़ी आपत्ति जताई थी, जिसके बाद सीईओ के निर्देश पर जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था। लेकिन पांच महीने बाद जांच अधिकारी ने भी इस मामले में जांच करने से मना कर दिया है।
इस पूरे मामले में सीबीआई की चार्जशीट में चारों अधिकारियों का नाम होने के बावजूद प्राधिकरण ने विभागीय जांच शासन में नहीं भेजी। शासन ने बार-बार प्राधिकरण से पूछा कि विभागीय जांच क्यों नहीं हो रही है। इस स्थिति के कारण इन अधिकारियों ने पदोन्नति का लाभ भी ले लिया है। वर्ष 2020 में अंडरग्राउंड केबलिंग प्रकरण में यादव सिंह समेत 20 अन्य अधिकारियों की चार्जशीट जारी की गई थी, लेकिन इन चार अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट नहीं भेजी गई। यह स्थिति इस बात को दर्शाती है कि प्राधिकरण में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं।
अंडरग्राउंड केबलिंग घोटाले की शिकायत सेक्टर-39 थाने में तत्कालीन एपीई आरपी सिंह ने दर्ज कराई थी और वह सीबीआई की जांच में सरकारी गवाह भी बने थे। उन्हें सीबीआई कार्यालय पर 250 से अधिक बार बुलाया गया था, लेकिन अब सीबीआई ने उन्हें भी इस प्रकरण में चार्जशीट कर दिया है। प्राधिकरण के सीईओ के निर्देश पर अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी वंदना त्रिपाठी ने कार्मिक विभाग के ओएसडी अशोक कुमार शर्मा की अध्यक्षता में दो वरिष्ठ प्रबंधकों की जांच कमेटी गठित की थी। जांच अधिकारी ने इस पूरे प्रकरण को तकनीकी बताते हुए तकनीकी अधिकारी की मांग की, जिसके बाद महाप्रबंधक सिविल एसपी सिंह को तकनीकी जांच अधिकारी बनाया गया। हालांकि, उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारी की जांच करने से मना कर दिया। अब जांच अधिकारी ने भी इस मामले से पल्ला झाड़ लिया है। अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी वंदना त्रिपाठी को इस जांच से संबंधित अपना जवाब प्रस्तुत कर दिया है।









