Air India turbulence incident: ब्लैक बॉक्स की जांच से खुलेंगे राज़

गौतम कुमार मिश्रा, नई दिल्ली। फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान संख्या एआई2379 में अचानक आए भीषण टर्बुलेंस के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय और एयर एक्सी
गौतम कुमार मिश्रा, नई दिल्ली। फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान संख्या एआई2379 में अचानक आए भीषण टर्बुलेंस के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय और एयर एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो ने जांच शुरू कर दी है। इस घटना के बाद, विमान के ब्लैक बॉक्स की जांच की जाएगी ताकि दुर्घटना की वास्तविक वजह का पता लगाया जा सके। विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, महानिदेशालय और अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के प्रोटोकॉल के तहत ब्लैक बॉक्स से डेटा निकालने और उसका विश्लेषण करने का कार्य किया जाएगा। यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करेगी कि सभी तकनीकी पहलुओं का ध्यान रखा जाए और किसी भी प्रकार की चूक को समझा जा सके।
इस जांच में दो प्रमुख उपकरणों का उपयोग किया जाएगा: काॅकपिट वॉइस रिकार्डर (सीवीआर) और फ्लाइट डेटा रिकार्डर (एफडीआर)। सीवीआर का कार्य काॅकपिट के भीतर पायलटों की बातचीत, अलार्म, स्विच ऑन-ऑफ होने की आवाजें और केबिन से आए संदेशों को रिकॉर्ड करना है। इससे यह स्पष्ट होगा कि क्या मौसम रडार से कोई शुरुआती चेतावनी मिली थी और पायलटों ने क्रू को क्या निर्देश दिए। दूसरी ओर, एफडीआर विमान की गति, ऊंचाई, इंजन का प्रदर्शन, ऑटोपायलट का स्टेटस और टर्बुलेंस के दौरान विमान पर पड़े 'जी-फोर्स' जैसे 800 से अधिक तकनीकी पैरामीटर्स का डेटा रिकॉर्ड करता है।
भारत में टर्बुलेंस का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले हुए हादसों की आधिकारिक जांच रिपोर्टों में कई गंभीर कमियां और नतीजे सामने आ चुके हैं। नियमों के अनुसार, एयर एक्सिडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो 30 दिनों के भीतर प्राथमिक तथ्यों वाली 'प्रारंभिक रिपोर्ट' जारी करेगा, जबकि विस्तृत 'अंतिम जांच रिपोर्ट' आने में 1 वर्ष का समय लग सकता है। लैब में डेटा निकालकर 3डी सिमुलेशन के जरिए हादसे के वक्त आसमान में घटित पूरे दृश्य का पुनर्निर्माण किया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि टर्बुलेंस को पूरी तरह रोकना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन पूर्व हादसों की जांच से मिले सबक, बेहतर कॉकपिट समन्वय और सख्त सीटबेल्ट अनुपालन से नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
















