Aligarh case: दहेज हत्या में पति, सास-ससुर और देवर दोषी, चारों को 15-15 साल का कारावास

अलीगढ़ के टप्पल क्षेत्र में दहेज के लिए एक नवविवाहिता की हत्या के मामले में अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट द
अलीगढ़ के टप्पल क्षेत्र में दहेज के लिए एक नवविवाहिता की हत्या के मामले में अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय, तारकेश्वरी सिंह ने पति, सास, ससुर और देवर को 15-15 साल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यह मामला उस समय प्रकाश में आया जब हरियाणा के फरीदाबाद निवासी जहरुद्दीन ने अपनी दो बेटियों मुनीश और गुलफ्सा का विवाह अलीगढ़ के टप्पल निवासी इदरीश के बेटों अतीक और सद्दीक से किया। शादी के कुछ समय बाद ही ससुराल पक्ष ने अतिरिक्त दहेज की मांग शुरू कर दी, जिसमें कार की मांग भी शामिल थी। दहेज की मांग पूरी न होने पर दोनों बहनों को शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। जहरुद्दीन ने 25 सितंबर 2023 को टप्पल थाने में मामला दर्ज कराया, लेकिन सामाजिक स्तर पर समझौता होने के कारण बेटियों को दोबारा ससुराल भेज दिया गया। हालांकि, समझौते के बाद भी प्रताड़ना जारी रही, जिसका अंत गुलफ्सा की हत्या में हुआ।
2 नवंबर 2023 को मुनीश ने अपने पिता को फोन कर बताया कि उसकी छोटी बहन गुलफ्सा की हत्या कर दी गई है। इस सूचना के बाद पुलिस ने मृतका के पिता की तहरीर पर पति अतीक, देवर सद्दीक, ससुर इदरीश और सास हमसर के खिलाफ दहेज हत्या का मामला दर्ज किया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र सत्र न्यायालय में दाखिल किया। अदालत ने सभी साक्ष्यों का गहन अध्ययन किया और चारों आरोपियों को दोषी ठहराया। इस मामले ने समाज में दहेज प्रथा के खिलाफ एक बार फिर से गंभीर सवाल उठाए हैं। दहेज के लिए हत्या की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, जिससे समाज में चिंता का माहौल है।















