Fraud in Bihar: महिलाओं को लखपति बनाने का सपना दिखाकर करोड़ों की ठगी

मुजफ्फरपुर से मिली जानकारी के अनुसार, स्मार्ट हट के माध्यम से मशरूम उत्पादन का सपना दिखाकर महिलाओं से करोड़ों रुपये की ठगी करने का मामला अब जांच के दायरे में आ
मुजफ्फरपुर से मिली जानकारी के अनुसार, स्मार्ट हट के माध्यम से मशरूम उत्पादन का सपना दिखाकर महिलाओं से करोड़ों रुपये की ठगी करने का मामला अब जांच के दायरे में आ गया है। इस ठगी का शिकार हुई जीविका दीदियों पर पहले से ही ऋण का बोझ है, और अब उन्हें यह भी पता चला है कि उनका सपना केवल एक धोखा था। स्मार्ट हट से मशरूम उत्पादन का लक्ष्य फरवरी 2024 में रखा गया था, लेकिन दो साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यह योजना धरातल पर नहीं उतर सकी। इस मामले में ग्रेविटी एग्रो एंड एनर्जी एजेंसी की संचालक शिवांगी कुमारी और निदेशक आशुतोष मंगलम पर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन पिछले साल सितंबर में प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। यह स्थिति इसलिए भी बनी है क्योंकि आरोपितों के राजनीतिक संपर्क हैं, जिससे उन्हें संरक्षण मिला हुआ है।
जैसे-जैसे यह मामला बढ़ता जा रहा है, सवाल उठने लगे हैं कि कैसे एक एजेंसी को बिना उसकी क्षमता का आकलन किए एक साथ 110 स्मार्ट हट के लिए साढ़े तीन करोड़ रुपये का काम सौंपा गया। एकरारनामे के अनुसार, एजेंसी को बोचहां और मुशहरी प्रखंडों में 10-10 जीविका दीदियों के समूह को स्मार्ट हट प्रदान करने थे। लेकिन एजेंसी ने ग्रामीण बैंक से ऋण की निकासी तो की, लेकिन स्मार्ट हट का निर्माण नहीं किया। इसके परिणामस्वरूप, बोचहां शाखा की प्रबंधक पल्लवी मिश्रा ने गबन की प्राथमिकी दर्ज कराई। मुशहरी में भी इसी तरह की स्थिति बनी रही, जिसके बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच का आदेश दिया है।
इस मामले में एक वरिष्ठ अधिकारी भी ठगी का शिकार हुआ है, जिसकी पत्नी से लाखों रुपये लेकर भी एजेंसी ने काम नहीं किया। इस मामले में भी प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। हालाँकि, कुछ राशि दबाव के बाद वापस की गई है। इससे पहले, पालीथिन कचरे से पेट्रोल बनाने की योजना का करार भी किया गया था, लेकिन वह योजना भी पूरी नहीं हो सकी। एजेंसी के पास इतने बड़े काम मिलने का कारण यह था कि कागज पर योजना बेहद आकर्षक बताई गई थी, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत रही। एक अधिकारी का कहना है कि एजेंसी को समझने में चूक हुई है और अब जांच के बाद सभी तथ्य सामने आएंगे। इस बीच, एजेंसी के निदेशक आशुतोष मंगलम ने बैंक पर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्हें समय पर राशि नहीं मिली, जिसके कारण परियोजना में देरी हुई।
















