Child Trafficking Case: नवजात तस्करी मामले में साकेत कोर्ट की सख्त टिप्पणी

दक्षिणी दिल्ली के साकेत कोर्ट ने एक अंतरराज्यीय बाल तस्करी रैकेट में शामिल एक आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा
दक्षिणी दिल्ली के साकेत कोर्ट ने एक अंतरराज्यीय बाल तस्करी रैकेट में शामिल एक आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि बच्चों की तस्करी एक घिनौना अपराध है जो सभ्य समाज की नैतिकता पर हमला करता है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरगुरवरिंदर सिंह जग्गी ने जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि बच्चों की तस्करी की समस्या पर गंभीर चिंता जताई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चे हमारे समाज के सबसे कमजोर सदस्य हैं और उनकी जिंदगी और इज्जत को व्यवसायिक बाजार में नहीं बेचा जा सकता। कोर्ट ने इस मामले में बच्चों की ट्रैफिकिंग और उनके कमोडिटी बनने के खतरे के बारे में अपनी गहरी चिंता व्यक्त की।
इस मामले की शुरुआत तब हुई जब महिलाओं और बच्चों के लिए स्पेशल पुलिस यूनिट को नवंबर 2023 में सफदरजंग अस्पताल में एक 18 साल की दुष्कर्म पीड़िता से पैदा हुई बच्ची की गैर-कानूनी गोद लेने की जानकारी मिली। आरोप है कि अस्पताल के एक हाउसकीपिंग असिस्टेंट ने पीड़ित परिवार को पैसे के बदले बच्ची देने के लिए मनाया। इसके बाद पीड़िता के चाचा को यूपीआइ के जरिए 50,000 रुपये ट्रांसफर किए गए। जांच में यह भी सामने आया कि बच्ची राज कुमार और उसकी पत्नी सुनीता उर्फ सोनिया तक पहुंचने से पहले कई आरोपितों के हाथों से गुजरी। आरोप है कि उन्होंने बच्ची को एक दिन अपने पास रखा और फिर 1.65 लाख रुपये में किसी दूसरे आरोपित को बेच दिया। इसके बाद बच्ची को कथित तौर पर 1.75 लाख रुपये में आगे बेच दिया गया।















