CJI Inclusion in CEC Appointment: PM पर भरोसा रखें, CJI को शामिल करने की क्या जरूरत

सुप्रीम कोर्ट में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (cec) और अन्य चुनाव आयुक्तों (ec) की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार और शीर्ष अदालत के बीच तीखी बहस हुई। केंद्र
सुप्रीम कोर्ट में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों (EC) की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार और शीर्ष अदालत के बीच तीखी बहस हुई। केंद्र सरकार ने अदालत में यह दलील दी कि चयन पैनल में प्रधानमंत्री की मौजूदगी पर भरोसा किया जाना चाहिए। सरकार ने कहा कि यह मान लेना पूरी तरह गलत है कि प्रधानमंत्री या उनके कैबिनेट मंत्री किसी गलत मंशा से काम करेंगे। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला प्रधानमंत्री में अविश्वास का नहीं है, बल्कि नियुक्ति प्रक्रिया में न्याय, पारदर्शिता और निष्पक्षता दिखाने का है। केंद्र सरकार ने यह भी सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री द्वारा गठित मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) के पैनल में भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को क्यों शामिल किया जाना चाहिए। यदि प्रधानमंत्री के निर्णय पर भरोसा नहीं किया जा सकता है, तो मंत्रिमंडल मंत्रियों की नियुक्ति पर सलाह देने के लिए किसी 'बाहरी व्यक्ति' या पूर्व न्यायाधीश को भी शामिल किया जाना चाहिए।
केंद्र सरकार ने बहस के दौरान कहा कि यह मान लेना गलत होगा कि चयन प्रक्रिया में संख्या के हिसाब से बहुमत होने के कारण प्रधानमंत्री और अन्य मंत्री गलत मंशा से काम करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर स्पष्ट किया कि यह मामला प्रधानमंत्री में अविश्वास का नहीं है, बल्कि मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्तियों में न्याय और निष्पक्षता के सिद्धांत का है। याचिकाओं में यह तर्क दिया गया है कि इस अधिनियम ने अनूप बर्नवाल मामले में संविधान पीठ के उस फैसले को 'अमान्य' कर दिया है, जिसमें प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मुख्य चुनाव आयोग के चयन पैनल का गठन किया गया था। इस पैनल में लोकसभा में विपक्ष के नेता और मुख्य न्यायाधीश शामिल थे।
















