Congress Pushes for Early Seat Sharing Talks with SP for UP Elections 2027: कांग्रेस यूपी विधानसभा चुनाव 2027 के लिए सपा से सीट शेयरिंग बातचीत की कोशिश कर रही है

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में कांग्रेस अपने सहयोगी दल समाजवादी पार्टी (एसपी) के साथ सीट शेयरिंग पर बातचीत जल्द शुरू करने पर जोर दे रही है। कांग्रेस का मा
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में कांग्रेस अपने सहयोगी दल समाजवादी पार्टी (एसपी) के साथ सीट शेयरिंग पर बातचीत जल्द शुरू करने पर जोर दे रही है। कांग्रेस का मानना है कि गठबंधन का आधार जीतने लायक सीटें होनी चाहिए, न कि यह कि कौन सी पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ती है। दोनों दल अपनी चुनावी जीत का आकलन करने के लिए सभी विधानसभा क्षेत्रों का अलग-अलग सर्वे कर रही हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस कवायद का उद्देश्य ऐसी सीटों को पहचानना है जहां पार्टी की संगठनात्मक मौजूदगी और सपा के सपोर्ट बेस व वोट शेयर के मेल से गठबंधन को मजबूत किया जा सके। 2017 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और सपा ने गठबंधन किया था, लेकिन वे उस समझ को प्रभावी तालमेल में नहीं बदल सके थे। कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि पिछले चुनावों में देर से हुई बातचीत और चुनाव क्षेत्र के स्तर पर सही तालमेल न होने के कारण, गठबंधन का असर जमीनी स्तर पर नहीं दिख सका। हाल ही में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ पार्टी के यूपी के सांसदों की बैठक में आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। सांसदों की आम राय यही थी कि बातचीत जल्द शुरू होनी चाहिए और सीटों का बंटवारा जीतने की संभावनाओं के आधार पर होना चाहिए। पार्टी के एक नेता ने कहा कि वे चाहते हैं कि मुख्यमंत्री कांग्रेस का बने, लेकिन यह सपा पर निर्भर करता है। उनका उद्देश्य राज्य में अपनी मौजूदगी बढ़ाना है। कांग्रेस के सांसदों का मानना है कि सीटों का जल्द चयन करने से विपक्ष के वोटों का बंटवारा रोका जा सकता है। हालांकि, सपा सावधानी से कदम उठा रही है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि सपा कांग्रेस के अंदरूनी मामलों पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के मुकाबले उनकी हिस्सेदारी अधिक महत्वपूर्ण है। सपा और कांग्रेस ने 2017 में चुनाव साथ मिलकर लड़ा था, जहां सपा ने 311 सीटों पर और कांग्रेस ने 114 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। लेकिन गठबंधन महज 54 सीटें ही जीत सका। कांग्रेस के एक वरिष्ठ सांसद ने कहा कि गठबंधन आखिरी समय में तय नहीं होता। यदि हमें साथ मिलकर चुनाव लड़ना है, तो हमें यह फैसला जल्दी करना होगा। 2017 में आपसी मुकाबले से भी कांग्रेस-सपा गठबंधन को कोई फ़ायदा नहीं हुआ। चुनाव से पहले सपा और कांग्रेस के बीच सीट-शेयरिंग का समझौता हुआ, जिसके तहत सपा ने राज्य की 80 में से 62 सीटों पर और कांग्रेस ने 17 सीटों पर चुनाव लड़ा। कांग्रेस अब विधानसभा चुनावों में भी 2024 वाले फॉर्मूले को अपनाना चाहती है, लेकिन सीटों के चयन की प्रक्रिया बहुत पहले शुरू करना चाहती है। इसका मतलब यह हो सकता है कि वे सामान्य तौर पर जितनी सीटें मांगते, उससे कम सीटों पर ही मान जाएं, बशर्ते उन सीटों से जीत की संभावना अधिक हो।















