Court boycott decision: कड़कड़डूमा कोर्ट में वकीलों के अपमान पर शाहदरा बार एसोसिएशन का बड़ा फैसला

पूर्वी दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर में स्थित शाहदरा बार एसोसिएशन ने हाल ही में फैमिली कोर्ट में अधिवक्ताओं के साथ हुए अपमानजनक व्यवहार के खिलाफ एक महत्वपूर
पूर्वी दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर में स्थित शाहदरा बार एसोसिएशन ने हाल ही में फैमिली कोर्ट में अधिवक्ताओं के साथ हुए अपमानजनक व्यवहार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। एसोसिएशन ने दो न्यायिक अधिकारियों, प्रधान न्यायाधीश एसएस राठी और महिला कोर्ट की जेएमएफसी रितिका कंसल, के बहिष्कार का निर्णय लिया है। यह निर्णय तब लिया गया जब कई अधिवक्ताओं ने इन न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ अभद्र और असम्मानजनक व्यवहार की शिकायतें की थीं। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि अधिवक्ताओं के साथ इस प्रकार का व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है और इसे रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। इस मामले में पहले भी कई बार न्यायालय के समक्ष शिकायतें प्रस्तुत की गई थीं, लेकिन न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
शाहदरा बार एसोसिएशन के मानद सचिव नरवीर डबास द्वारा जारी एक नोटिस में बताया गया है कि इन शिकायतों के बावजूद संबंधित न्यायिक अधिकारियों के आचरण में कोई सुधार नहीं आया। इस स्थिति को देखते हुए एसोसिएशन की कार्यकारिणी समिति ने बैठक आयोजित की, जिसमें इस मामले पर विस्तार से चर्चा की गई। अंततः यह निर्णय लिया गया कि संबंधित अदालतों का बहिष्कार किया जाएगा। नोटिस में एक विशेष घटना का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें प्रधान न्यायाधीश एसएस राठी ने बार के एक वरिष्ठ सदस्य को कथित रूप से 'दलाल' कहकर संबोधित किया। इस प्रकार की टिप्पणी को एसोसिएशन ने अस्वीकार्य करार दिया है।
एसोसिएशन ने इस बात पर जोर दिया है कि बेंच और बार के बीच संबंध आपसी सम्मान और सहयोग पर आधारित होने चाहिए। न्यायिक अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे अधिवक्ताओं के साथ शिष्टाचार, धैर्य और निष्पक्षता से पेश आएं। एसोसिएशन ने अधिवक्ताओं के अपमान, डराने या अनुचित व्यवहार की किसी भी घटना के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की बात कही है। इसी नीति के तहत दोनों न्यायिक अधिकारियों के बहिष्कार का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय न केवल अधिवक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि न्यायपालिका के प्रति सम्मान और गरिमा को बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है।















