Delhi HC's Strict Remarks on Train Gangrape Case: रेलवे जिम्मेदारी से नहीं बच सकता; पीड़िता को मिलेगा मुआवजा

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बिहार के लखीसराय रेलवे स्टेशन पर एक महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म के मामले में रेलवे की जिम्मेदारी को लेकर सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने
दिल्ली उच्च न्यायालय ने बिहार के लखीसराय रेलवे स्टेशन पर एक महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म के मामले में रेलवे की जिम्मेदारी को लेकर सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) द्वारा पीड़िता को तीन लाख रुपये मुआवजा देने की सिफारिश को सही ठहराते हुए कहा कि रेलवे यह नहीं कह सकता कि अपराध करने वाले रेलवे कर्मचारी नहीं थे। न्यायमूर्ति अमित बंसल की पीठ ने रेल मंत्रालय की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें एनएचआरसी के 30 अप्रैल 2014 और 19 अप्रैल 2016 के निर्णयों को चुनौती दी गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि रेलवे अधिनियम की धारा 123(सी) में प्लेटफार्म या रेलवे परिसर में होने वाले हिंसक हमलों को अनचाही घटना की परिभाषा में शामिल किया गया है। सामूहिक दुष्कर्म को अदालत ने एक हिंसक हमला मानते हुए इसे कानूनी परिभाषा के दायरे में रखा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि रेलवे अधिनियम की धारा 124ए के तहत, रेलवे प्रशासन को किसी भी अप्रिय घटना में घायल यात्रियों को मुआवजा देने की जिम्मेदारी है, चाहे उसकी तरफ से अपराध, लापरवाही या चूक हुई हो या नहीं। पीठ ने यह माना कि पीड़िता एक वैध टिकट के साथ यात्रा कर रही थी और ट्रेन के डिब्बे के अंदर सुरक्षित माहौल प्रदान करना रेलवे की जिम्मेदारी थी। अदालत ने कहा कि निजी अपराधियों की भूमिका रेलवे को उसकी कानूनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करती है। इस मामले में, रेलवे ने एनएचआरसी के आदेशों को चुनौती दी थी, जिसमें पीड़िता को मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था।
















