Farmers Protest in Punjab: गन्ना भुगतान नहीं मिला तो पंजाब में 20 अगस्त को सड़कों पर उतरेंगे किसान

पंजाब में गन्ना किसानों के बकाया भुगतान का मुद्दा एक बार फिर से गरमा गया है। भारतीय किसान यूनियन दोआबा ने चेतावनी दी है कि यदि किसानों की लंबित राशि का जल्द भुग
पंजाब में गन्ना किसानों के बकाया भुगतान का मुद्दा एक बार फिर से गरमा गया है। भारतीय किसान यूनियन दोआबा ने चेतावनी दी है कि यदि किसानों की लंबित राशि का जल्द भुगतान नहीं किया गया तो 20 अगस्त से राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। संगठन ने यह भी बताया है कि पहले फगवाड़ा में एक विशाल रैली का आयोजन किया जाएगा, जिसके बाद किसान सड़कों पर उतरकर अपने हक के लिए संघर्ष करेंगे। जालंधर स्थित पंजाब प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान भारतीय किसान यूनियन दोआबा के प्रधान मनजीत सिंह राय ने कहा कि सरकार किसानों के साथ हुए समझौते को लागू कराने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने कहा कि किसानों का वर्ष 2021-22 का लगभग 27 करोड़ 84 लाख रुपये का भुगतान अब भी लंबित है। इसके अलावा, वर्ष 2025-26 के गन्ना सीजन में प्रति क्विंटल 68 रुपये 50 पैसे के हिसाब से मिलने वाली राशि और फगवाड़ा चीनी मिल की ओर से प्रति क्विंटल 41 रुपये 60 पैसे की काटी गई पेनल्टी का भुगतान भी अभी तक नहीं किया गया है। मनजीत सिंह राय ने आरोप लगाया कि सहकारी चीनी मिलों की ओर किसानों का बकाया लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन सरकार इस मामले में कोई प्रभावी कदम नहीं उठा रही। उनका कहना था कि कृषि मंत्री की मौजूदगी में जो समझौता हुआ था, उसमें किसानों ने अपनी सभी शर्तों का पालन किया, लेकिन सरकार ने अपने वादे पूरे नहीं किए। इससे किसानों में भारी नाराजगी है। आंदोलन शुरू करने से पहले सरकार को एक और अवसर दिया जाएगा। इसके तहत 10 अगस्त को किसान यूनियन का प्रतिनिधिमंडल कपूरथला के उपायुक्त को मांग पत्र के साथ चेतावनी पत्र भी सौंपेगा। यदि इसके बाद भी कोई समाधान नहीं निकला तो 20 अगस्त को फगवाड़ा की दाना मंडी में विशाल किसान रैली आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि रैली के बाद किसान सड़कों पर उतरेंगे और आंदोलन को आगे कैसे बढ़ाया जाएगा, इसका अंतिम निर्णय भी 20 अगस्त को रैली के दौरान ही लिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आंदोलन के कारण आम लोगों को किसी प्रकार की परेशानी होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी, क्योंकि किसानों को मजबूरी में यह रास्ता अपनाना पड़ रहा है।















