FDI approvals in India: भारत ने चीन के सिर्फ एक एफडीआई प्रस्ताव को दी मंजूरी

भारत ने पिछले वित्त वर्ष में चीन से केवल एक एफडीआई प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिसका कुल मूल्य एक करोड़ रुपये था। यह आंकड़ा इस बात को दर्शाता है कि चीन से भारत मे
भारत ने पिछले वित्त वर्ष में चीन से केवल एक एफडीआई प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिसका कुल मूल्य एक करोड़ रुपये था। यह आंकड़ा इस बात को दर्शाता है कि चीन से भारत में निवेश की स्थिति कितनी सीमित है। वहीं, हांगकांग से 610.42 करोड़ रुपये के 13 एफडीआई प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई है। यह मंजूरियां इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से निवेश के लिए अप्रैल 2020 से पूर्व सरकारी मंजूरी अनिवार्य कर दी गई है। इस नीति का उद्देश्य कोरोना महामारी के दौरान भारतीय कंपनियों के अधिग्रहणों को रोकना है, ताकि देश की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआइआइटी) द्वारा जारी प्रेस नोट 3 के तहत यह निर्णय लिया गया।
डीपीआईआईटी के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच भारत सरकार ने कुल 10,292.67 करोड़ रुपये (1.18 अरब डॉलर) मूल्य के 63 एफडीआई प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इस अवधि में सिंगापुर एफडीआई प्रस्तावों का सबसे बड़ा स्रोत बना, जिसके 3,259.88 करोड़ रुपये के पांच प्रस्तावों को स्वीकृति मिली। इसके बाद ब्रिटेन का स्थान रहा, जिसके 2,477.67 करोड़ रुपये के पांच प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। थाईलैंड से भी दो प्रस्तावों को स्वीकृति मिली, जिनका कुल मूल्य 1,600 करोड़ रुपये था। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत में विदेशी निवेश के लिए सिंगापुर और ब्रिटेन जैसे देशों का रुझान अधिक है।
















