Five years of rule but no disillusionment: पदवी पर प्रधानी बरकरार, भुगतान में प्रधान के नाम की मुहर

प्रयागराज जिले में ग्राम पंचायतों के प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद उनके द्वारा प्रधानी का ठप्पा लगाना जारी है। सरकार ने पांच साल तक सेवा देने वाले
प्रयागराज जिले में ग्राम पंचायतों के प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद उनके द्वारा प्रधानी का ठप्पा लगाना जारी है। सरकार ने पांच साल तक सेवा देने वाले प्रधानों को प्रशासक बना दिया है, लेकिन वे अब भी सरकारी दस्तावेजों पर प्रधान के रूप में हस्ताक्षर कर रहे हैं। हाल ही में गंगापार के ब्लाक बहादुरपुर की ग्राम पंचायत बहादुरपुर तालुके इब्राहिमपुर में पंचायत सहायक के मानदेय के भुगतान में यह मामला सामने आया है। यहां 30 हजार रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर जो बिल लगाया गया है, उसमें सचिव के हस्ताक्षर नहीं हैं। प्रशासक के हस्ताक्षर तो हैं, लेकिन उन्होंने अपने नाम के स्थान पर प्रधान लिखा है। यह स्थिति न केवल बहादुरपुर में, बल्कि जिले की अन्य ग्राम पंचायतों में भी देखी जा रही है।
चकिया धरहरा में सामुदायिक शौचालय, हैंडपंप, सबमर्सिबल और इन्वर्टर की मरम्मत के लिए 16,965 रुपये का भुगतान किया गया। इस भुगतान के लिए सामग्री की आपूर्ति करने वाली फर्म के बिल पर प्रशासक और सचिव के हस्ताक्षर होना आवश्यक है, साथ ही पेड एंड कैंसल की मुहर भी होनी चाहिए। लेकिन यहां भी प्रशासक ने अपना पदनाम प्रधान लिखा है। कौड़िहार ब्लाक के पूरे घासी गांव में भी पंचायत सहायक के मानदेय के 12 हजार रुपये के भुगतान में यही स्थिति देखने को मिली। पोर्टल पर अपलोड किए गए बिल में निवर्तमान प्रधान ने प्रशासन के बजाय प्रधान के रूप में हस्ताक्षर किए हैं। यह केवल कुछ उदाहरण हैं, जिले की सभी 1540 ग्राम पंचायतों में कार्यकाल समाप्त होने के बाद हुए भुगतानों की जांच की जाए तो कई गांवों में इसी तरह की अनियमितताएं मिल सकती हैं।
















