Political Shift in Bankipur: 35 साल बाद बीजेपी का वर्चस्व टूटता दिख रहा है

बांकीपुर उपचुनाव में जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर की जीत की संभावनाएं बढ़ती जा रही हैं। यदि ये रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो भाजपा का पिछले 35 वर्षों से चला
बांकीपुर उपचुनाव में जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर की जीत की संभावनाएं बढ़ती जा रही हैं। यदि ये रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो भाजपा का पिछले 35 वर्षों से चला आ रहा कब्ज़ा समाप्त हो जाएगा। इस उपचुनाव को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुकाबले के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि बांकीपुर भाजपा का गढ़ रहा है। प्रशांत किशोर की जीत न केवल जन सुराज को उसकी सबसे बड़ी चुनावी सफलता दिलाएगी, बल्कि राज्य में राजनीतिक विमर्श को भी बदल देगी। भाजपा के लिए यह चुनाव एक बड़ा झटका साबित हो सकता है, क्योंकि पार्टी को नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतारने से पहले अपना उम्मीदवार बदलना पड़ा था। नीरज कुमार सिन्हा की पहचान प्रशांत किशोर की तुलना में कम रही है, जबकि प्रशांत किशोर पूरे चुनाव के दौरान अभियान के केंद्र में बने रहे।
प्रशांत किशोर ने लगभग दो महीने पहले ही बांकीपुर में प्रचार शुरू कर दिया था। इस दौरान उन्होंने जनसभाएं, घर-घर जाकर प्रचार और बूथ-स्तर पर जनसंपर्क किया। उनके शुरुआती अभियान ने जन सुराज को अन्य प्रमुख दलों द्वारा अपने चुनावी प्रयासों को तेज करने से पहले अपना संगठन खड़ा करने का अधिक समय दिया। भाजपा ने इस चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा की लड़ाई माना है और इस सीट को बरकरार रखने के लिए लगभग 40 स्टार प्रचारकों और हजारों कार्यकर्ताओं को तैनात किया। चुनाव के अंतिम चरण में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने निर्वाचन क्षेत्र में व्यापक प्रचार किया। यह उपचुनाव भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के लिए भी महत्वपूर्ण है, जिन्होंने बिहार विधानसभा में लगातार पांच बार बांकीपुर का प्रतिनिधित्व किया है। उनका राजनीतिक करियर इस निर्वाचन क्षेत्र से गहराई से जुड़ा हुआ है।















