Flag Controversy: उमर अब्दुल्ला ने महबूबा मुफ्ती का किया बचाव

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हाल ही में तिरंगा विवाद पर पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि किसी राज्य की मुख्य
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हाल ही में तिरंगा विवाद पर पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि किसी राज्य की मुख्यमंत्री रह चुकी नेता द्वारा जानबूझकर राष्ट्रीय ध्वज को उल्टा पकड़े जाने की संभावना नहीं है। उमर अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि यह एक अनजाने में हुई गलती हो सकती है। उनका मानना है कि महबूबा मुफ्ती ने तिरंगे को उल्टा पकड़ा होगा, लेकिन यह निश्चित रूप से जानबूझकर नहीं किया गया होगा। उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि कोई व्यक्ति, जिसने किसी राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में काम किया हो, वह जानबूझकर तिरंगे को उल्टा पकड़ेगा। मुझे लगता है कि उनसे यह गलती अनजाने में हुई होगी।' इस बयान के साथ ही उमर अब्दुल्ला ने महबूबा मुफ्ती के प्रति अपनी सहानुभूति व्यक्त की है।
उमर अब्दुल्ला ने तिरंगा विवाद के साथ-साथ अनुच्छेद 370 के हटाए जाने की सातवीं वर्षगांठ पर भी केंद्र सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि सात साल बीत जाने के बावजूद जम्मू-कश्मीर के लोगों के जख्म अब तक नहीं भरे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अनुच्छेद 370 के हटने के बाद जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस नहीं मिला है। उमर अब्दुल्ला ने कहा, "अनुच्छेद 370 हटाए जाने के सात साल हो गए हैं, लेकिन हमारे जख्म अभी तक नहीं भरे हैं। सात साल गुजरने के बाद भी जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस नहीं मिला है।" यह बयान उस समय आया है जब जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक स्थिति को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल कराने और न्याय की लड़ाई लड़ने के अपने संकल्प पर कायम है। उमर अब्दुल्ला ने कहा, 'हम न्याय की अपनी लड़ाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और राज्य का दर्जा बहाल होने तक अपनी मांग उठाते रहेंगे।' हाल ही में महबूबा मुफ्ती का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह कथित तौर पर तिरंगे को उल्टा पकड़े हुए दिखाई दी थीं। इस वीडियो को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। अब इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि इसे जानबूझकर किया गया कृत्य नहीं माना जाना चाहिए।
















