Gangster Sujit Sinha Murder: रांची पुलिस अलर्ट, जमानत पर बाहर शूटरों की जांच शुरू

झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की हत्या के बाद रांची पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करते हुए अलर्ट मोड में प्रवेश कर लिया है। पुलिस अब सुजीत सिन्हा
झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की हत्या के बाद रांची पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करते हुए अलर्ट मोड में प्रवेश कर लिया है। पुलिस अब सुजीत सिन्हा गिरोह के उन सभी सदस्यों और शूटरों की कुंडली खंगालने में जुट गई है, जो वर्तमान में जेल से जमानत पर बाहर हैं। रांची पुलिस का मुख्य उद्देश्य गैंग के बचे हुए सदस्यों पर शिकंजा कसना और क्षेत्र में किसी भी संभावित गैंगवार या कानून व्यवस्था की स्थिति को बिगड़ने से रोकना है। एसएसपी राकेश रंजन के निर्देश पर रांची पुलिस की विशेष टीमें जमानत पर छूटे गिरोह के सदस्यों की तलाश में जुटी हैं। पुलिस इन सभी को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की तैयारी कर रही है। इस पूछताछ के जरिए पुलिस यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि सुजीत सिन्हा की हत्या के बाद गिरोह की कमान कौन संभाल रहा है और क्या गैंग के सदस्य किसी बड़ी जवाबी कार्रवाई या आपराधिक घटना की साजिश तो नहीं रच रहे हैं। इसके साथ ही पुलिस उन अपराधियों की गतिविधियों और उनके वर्तमान ठिकानों की भी निगरानी कर रही है जो हाल के महीनों में जेल से बाहर आए हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, सुजीत सिन्हा गिरोह कोयला अंचल से लेकर राजधानी तक रंगदारी, ठेकेदारी में वर्चस्व और जमीन विवाद से जुड़े अपराधों में सक्रिय रहा है। उसकी मौत के बाद गिरोह में बिखराव या नए सिरे से वर्चस्व की जंग शुरू होने की आशंका बनी हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस इस पूरे आपराधिक नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए चौतरफा रणनीति बना रही है। संदिग्धों के ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है और उनके पुराने मददगारों पर भी नजर रखी जा रही है ताकि इस गिरोह के प्रभाव को पूरी तरह खत्म किया जा सके। रांची पुलिस ने इस मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए सभी संभावित सुरागों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस का मानना है कि गिरोह के अन्य सदस्यों की गतिविधियों पर नजर रखना बेहद आवश्यक है ताकि किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि को समय रहते रोका जा सके। इसके अलावा, पुलिस ने स्थानीय लोगों से भी अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें। इस तरह की सामूहिक जागरूकता से पुलिस को गिरोह के सदस्यों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने में मदद मिलेगी।
















