Midday Meal Crisis in Giridih: गिरिडीह के सरकारी स्कूलों में एमडीएम ठप होने की कगार पर

गिरिडीह जिले के सरकारी विद्यालयों में एक बार फिर से मध्याह्न भोजन योजना पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। चावल और आवश्यक राशि की कमी के कारण यह योजना ठप होने के
गिरिडीह जिले के सरकारी विद्यालयों में एक बार फिर से मध्याह्न भोजन योजना पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। चावल और आवश्यक राशि की कमी के कारण यह योजना ठप होने के कगार पर पहुँच गई है। कई विद्यालयों में मध्याह्न भोजन का संचालन पूरी तरह से बंद हो चुका है, जिससे सैकड़ों बच्चे दोपहर के भोजन से वंचित हो रहे हैं। यह स्थिति न केवल बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी गंभीर उल्लंघन है। गिरिडीह जिले में कुल 3122 विद्यालय हैं, जहाँ प्रतिदिन लगभग दो से ढाई लाख बच्चे मध्याह्न भोजन का लाभ उठाते हैं। लेकिन अब कई विद्यालयों में जैसे कि मध्य विद्यालय बदडीहा में, यह योजना पूरी तरह से ठप हो गई है। अन्य विद्यालय भी इसी स्थिति का सामना कर रहे हैं।
मध्याह्न भोजन योजना के लिए इस वर्ष अब तक केवल पहली तिमाही, यानी अप्रैल से जून तक का चावल ही विद्यालयों को उपलब्ध कराया गया है। दूसरी तिमाही का पहला महीना बीत चुका है, लेकिन अभी तक चावल की कोई नई खेप नहीं आई है। विद्यालयों में चावल के साथ-साथ कुकिंग कॉस्ट की राशि का भी अभाव है। शिक्षकों का कहना है कि चावल और राशि की कमी के कारण उन्हें बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जब कुकिंग कॉस्ट की राशि नहीं होती है, तो कुछ दिन दुकानों से उधार लेकर काम चलाया जाता है, लेकिन चावल की कमी के कारण मजबूरी में मध्याह्न भोजन बंद करना पड़ता है।



















