High Court: हाईकोर्ट के जजों पर समय से अदालत में न बैठने का आरोप खारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जजों पर अदालत में समय से नहीं बैठने का आरोप लगाने वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के जजों के खिलाफ
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जजों पर अदालत में समय से नहीं बैठने का आरोप लगाने वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के जजों के खिलाफ परमादेश जारी करने की मांग को पोषणीय नहीं माना गया है। न्यायालय ने कहा कि इस प्रकार के आरोपों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है। यह निर्णय मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने सुनाया। याचिका में याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट के जजों के फुल कोर्ट ने 27 अगस्त 2008 को एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसके अनुसार हाईकोर्ट की अदालतों को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे और फिर दोपहर 2 बजे से शाम 4 बजे तक न्यायिक कार्य करना चाहिए। याचिकाकर्ता का आरोप था कि इस प्रस्ताव का पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न हो रही है। हालांकि, अदालत ने इस मामले में कोई भी आदेश देने से इनकार कर दिया है।
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि समय पर अदालत में उपस्थित न होने के कारण न्यायिक कार्य में देरी हो रही है, जिससे आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि कई बार सुनवाई में देरी के कारण महत्वपूर्ण मामलों का निपटारा नहीं हो पा रहा है। लेकिन अदालत ने इस बात को मानने से इनकार कर दिया कि जजों की अनुपस्थिति से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। न्यायालय ने यह भी कहा कि जजों के कार्य करने के तरीके में हस्तक्षेप करना उचित नहीं है और यह उनके अधिकार क्षेत्र में आता है।
















