Interviews for Small Jobs in Rajasthan: छोटी सरकारी नौकरियों के लिए इंटरव्यू खत्म करने की तैयारी

राजस्थान में छोटी सरकारी नौकरियों के लिए इंटरव्यू खत्म करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। यह निर्णय प्रधानमंत्री कार्यालय (pmo) द्वारा राजस्थान सरकार से रिपोर
राजस्थान में छोटी सरकारी नौकरियों के लिए इंटरव्यू खत्म करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। यह निर्णय प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा राजस्थान सरकार से रिपोर्ट मांगने के बाद लिया गया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री की मंशा के अनुरूप अब छोटी नौकरियों में इंटरव्यू नहीं लिया जाएगा। यह बदलाव तब आया है जब आजतक ने इस मुद्दे को उठाया था, जिसमें बताया गया था कि कैसे इंटरव्यू के कारण युवाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ और अंततः यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।
राजस्थान सरकार ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि छोटी सरकारी नौकरियों में इंटरव्यू खत्म करने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है, जिससे उम्मीदवारों को राहत मिलेगी। आजतक की जांच में यह भी सामने आया है कि राजस्थान के कई आयोग, बोर्ड और प्राधिकरण लंबे समय से खाली पड़े हैं। राजस्थान लोक सेवा आयोग में अध्यक्ष और सचिव के पद खाली हैं, जबकि दस सदस्यों में से केवल पांच सदस्य ही काम कर रहे हैं। इस स्थिति के कारण कई भर्तियों का काम प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा, राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड में भी सभी पद भरे नहीं गए हैं। महिला आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की कमी के कारण कामकाज लगभग ठप हो गया है।
राजस्थान सिविल सेवा अपील प्राधिकरण में भी लंबे समय से पद खाली पड़े हैं, जिसके कारण लगभग दो हजार मामले अटके हुए हैं। इस स्थिति के चलते राजस्थान हाईकोर्ट को राज्य सरकार को अल्टीमेटम देना पड़ा है। जयपुर स्थित लोकायुक्त कार्यालय का हाल भी ऐसा ही है, जहां मार्च से लोकायुक्त का पद खाली पड़ा है, जिससे शिकायतों की जांच का काम पूरी तरह रुक गया है। इसके अलावा, खादी निगम, पर्यटन निगम, हाउसिंग बोर्ड और समाज कल्याण बोर्ड जैसी कई संस्थाओं में भी अध्यक्ष और सदस्यों की तैनाती नहीं हो सकी है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के बोर्ड, निगम, आयोग और प्राधिकरण में 100 से ज्यादा पद खाली हैं, जिससे सरकारी कामकाज पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। अब यह देखना होगा कि राजस्थान सरकार कब तक इस निर्णय को लागू करती है और खाली पड़े आयोगों व बोर्डों में नियुक्तियां कब तक होती हैं।
















