ITAT Chennai Ruling: सिर्फ गलत शेड्युट चुनने पर ग्रैच्युटी टैक्स छूट नहीं होगी खारिज

टैक्स से जुड़ी छोटी सी गलती कई बार लोगों और कंपनियों के लिए बड़ी परेशानी बन जाती है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां itr में ग्रैच्युटी की रकम गलत जगह दर्ज ह
टैक्स से जुड़ी छोटी सी गलती कई बार लोगों और कंपनियों के लिए बड़ी परेशानी बन जाती है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां ITR में ग्रैच्युटी की रकम गलत जगह दर्ज होने की वजह से एक कंपनी को 79.25 लाख रुपये की टैक्स कटौती का फायदा नहीं मिल पाया। हालांकि, अब इस मामले में कंपनी को बड़ी राहत मिली है। चेन्नई के इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) ने स्पष्ट कहा है कि यदि कोई टैक्स कटौती कानून के अनुसार सही है, तो सिर्फ ITR में उसे गलत जगह दर्ज करने के कारण उसे खारिज नहीं किया जा सकता।
यह मामला असेसमेंट ईयर 2020-21 से संबंधित है। कंपनी ने 18 दिसंबर 2020 को अपनी इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल की थी, जिसमें उसने लगभग 38.1 लाख रुपये की कुल आय बताई थी। जब बेंगलुरु के टैक्स प्रोसेसिंग सेंटर ने कंपनी की ITR को प्रोसेस किया, तो उसकी आय लगभग 1.18 करोड़ रुपये मानी गई। इसी दौरान कंपनी की 79.25 लाख रुपये की ग्रैच्युटी कटौती को भी हटा दिया गया।
कंपनी ने ग्रैच्युटी की रकम पर इनकम टैक्स एक्ट की धारा 43B के तहत कटौती का दावा किया था, लेकिन यह रकम ITR में सही जगह पर दर्ज नहीं की गई थी। कंपनी ने इसे Schedule BP में दर्ज करने के बजाय ITR के दूसरे हिस्से में दिखा दिया, जिससे टैक्स विभाग ने 79.25 लाख रुपये की कटौती को मंजूर नहीं किया। कंपनी ने बाद में बताया कि ग्रैच्युटी की पूरी रकम संबंधित साल में वास्तव में दी गई थी और टैक्स विभाग से रिकॉर्ड में सुधार करने की मांग भी की, लेकिन राहत नहीं मिली।
इसके बाद कंपनी ने इस मामले को ITAT के सामने रखा। ITAT ने कंपनी की दलील को सही माना और कहा कि ग्रैच्युटी की रकम वास्तव में दी गई थी। ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि इससे जुड़े जरूरी तथ्य टैक्स रिकॉर्ड में मौजूद थे। इसलिए कंपनी पर सिर्फ इस गलती की वजह से अतिरिक्त टैक्स का बोझ डालना उचित नहीं होगा। ITAT ने 1955 के CBDT सर्कुलर का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि यदि कोई टैक्सपेयर कानून के तहत किसी छूट या कटौती का हकदार है, तो टैक्स अधिकारियों को उसे उसका लाभ दिलाने में मदद करनी चाहिए। इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि ITR में हुई अनजाने में गलती की वजह से हर बार सही टैक्स कटौती खत्म नहीं हो जाती।

















