Justice Vikram Nath's Statement: सरकारी संस्थानों को सवाल-जवाब के लिए रहना चाहिए तैयार

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस विक्रम नाथ ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि सरकारी संस्थानों को नागरिकों के सवालों का जवाब देने के लिए हमेशा तैय
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस विक्रम नाथ ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि सरकारी संस्थानों को नागरिकों के सवालों का जवाब देने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज के समय में लोग अपने अधिकारों और उन पर शासन करने वाले संस्थानों के प्रति अधिक जागरूक हो गए हैं। जस्टिस नाथ ने कहा कि यह एक अभूतपूर्व समय है, जहां नागरिक अपने अधिकारों के प्रति सजग हैं और ऐसे में संस्थानों को भी अपनी जिम्मेदारियों का पालन करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संस्थानों की शक्ति का हिस्सा है, न कि किसी प्रकार का खतरा। अगर नागरिकों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे संस्थानों का सम्मान करें, तो संस्थानों को भी अपनी शक्तियों के लिए जवाबदेह बनना होगा। न्याय, निष्पक्षता और पारदर्शिता केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे उन लोगों के अनुभवों में भी महसूस किया जाना चाहिए जो न्याय प्रणाली का सामना करते हैं।
जस्टिस नाथ ने संवैधानिक लोकतंत्र में अदालतों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अदालतों को अक्सर अधिकारों के संरक्षक के रूप में देखा जाता है, लेकिन यह जिम्मेदारी तभी सार्थक होती है जब लोग अपनी स्वतंत्रता और समानता की रक्षा के लिए न्यायालयों का रुख करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि न्याय देने की जिम्मेदारी केवल जजों की नहीं है, बल्कि इसमें वकील, कोर्ट के कर्मचारी और न्याय वितरण प्रणाली से जुड़े सभी लोग शामिल हैं। इस प्रकार, न्याय का वितरण एक सामूहिक प्रयास होना चाहिए, जिसमें सभी की भागीदारी आवश्यक है।
















