Expressway condition raises questions: कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे की हालत पर उठे सवाल, एक माह में धंसी सड़क

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे को आधुनिक तकनीक और उन्नत निगरानी प्रणाली के साथ बनाया गया था, लेकिन हालात यह हैं कि हाल के दिनों में पैंतालीस किलोमीटर की दूरी में हर द
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे को आधुनिक तकनीक और उन्नत निगरानी प्रणाली के साथ बनाया गया था, लेकिन हालात यह हैं कि हाल के दिनों में पैंतालीस किलोमीटर की दूरी में हर दो किलोमीटर पर सड़क धंसने की घटनाएं सामने आई हैं। यह स्थिति यह सवाल उठाती है कि क्या गुणवत्ता के मानकों की अनदेखी की गई थी। यदि ऐसा नहीं है, तो आखिर एक महीने के भीतर सड़क की सतह का धंसना क्यों शुरू हुआ?
यह पहली बार नहीं है जब किसी एक्सप्रेस-वे का निर्माण के कुछ समय बाद क्षतिग्रस्त होने की घटना हुई है। पिछले महीने प्रयागराज से मेरठ को जोड़ने वाले गंगा एक्सप्रेस-वे का लगभग साठ मीटर हिस्सा धंस गया था, जबकि इसका उद्घाटन तीन महीने पहले हुआ था। कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर वाहनों की आवाजाही भी एक महीने से कम समय में शुरू हुई है।
इससे यह स्पष्ट होता है कि केवल आधुनिक तकनीक से निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं की जा सकती। इंजीनियरों की निगरानी और निर्माण सामग्री की जांच में लापरवाही का परिणाम ऐसी क्षतियों के रूप में सामने आता है। सड़क निर्माण में खामियां कभी-कभी वाहन दुर्घटनाओं का कारण भी बनती हैं। जब तक सार्वजनिक निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी और जिम्मेदारी तय नहीं की जाएगी, तब तक मानकों का पालन नहीं हो सकेगा।















