Land Consolidation Issues: प्रयागराज के 3 गांवों में 30 वर्ष बाद भी लंबित चकबंदी प्रक्रिया

प्रयागराज में चकबंदी की प्रक्रिया ने किसानों के जीवन को प्रभावित किया है। 30 वर्षों से चल रही चकबंदी की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो पाई है, जिससे स्थानीय निवास
प्रयागराज में चकबंदी की प्रक्रिया ने किसानों के जीवन को प्रभावित किया है। 30 वर्षों से चल रही चकबंदी की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो पाई है, जिससे स्थानीय निवासियों में निराशा और हताशा का माहौल बना हुआ है। हंडिया क्षेत्र के जमशेदपुर, रसूलपुर मवैया और बढौली गांवों में 1996 से शुरू हुई चकबंदी का पहला चरण भी अभी तक पूरा नहीं हो सका है। इस दौरान कई पीढ़ियां गुजर गईं, जिनमें से एक प्रमुख उदाहरण लालबिहारी का है, जो 77 वर्ष की आयु में चकबंदी शुरू होने के दो वर्ष बाद ही निधन हो गए। उनके बेटे गजेंद्रनाथ भी 54 वर्ष की उम्र में चकबंदी की प्रक्रिया के दौरान ही गुजर गए। इस प्रकार, चकबंदी की लंबी प्रक्रिया ने न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया है, बल्कि उनके जीवन के कई महत्वपूर्ण क्षणों को भी छीन लिया है।
प्रयागराज जनपद में कुल 45 गांवों में चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है, जिसमें फूलपुर क्षेत्र में सबसे अधिक 20 गांव शामिल हैं। इसके अलावा, कोरांव में आठ, मेजा और हंडिया में सात-सात गांवों में चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है। फूलपुर के गांवों में 2016 से 2024 के बीच विभिन्न चरणों में चकबंदी शुरू की गई है, लेकिन कई गांवों में यह प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है। चकबंदी की प्रक्रिया को लेकर लोगों की शिकायतें शासन तक पहुंचने लगी हैं, जिसके चलते मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि चकबंदी के नाम पर किसी को परेशान नहीं किया जाएगा। इसके बाद चकबंदी वाले गांवों की फाइलें तलब की गईं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यमुनापार के अधिकांश गांवों के लोग चकबंदी से सहमत हैं, लेकिन उनके नक्शे अभिलेखागार में उपलब्ध नहीं हैं।
















