Parliament Delays: परिसीमन बिल पर मोदी सरकार के सामने दो विकल्प

भारत की संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई को शुरू हुआ था, जिसके दौरान सभी की नजरें परिसीमन बिल पर थीं। हालांकि, तीन सप्ताह बीत जाने के बावजूद यह बिल अभी तक पेश नहीं
भारत की संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई को शुरू हुआ था, जिसके दौरान सभी की नजरें परिसीमन बिल पर थीं। हालांकि, तीन सप्ताह बीत जाने के बावजूद यह बिल अभी तक पेश नहीं किया गया है। अब मोदी सरकार ने 13 अगस्त को समाप्त होने वाले इस सत्र को तीन दिन के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस दौरान सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक को संसद में लाने की तैयारी कर रही है। लेकिन इस प्रक्रिया में कई राजनीतिक अड़चनें भी सामने आ रही हैं। सरकार को इन विधेयकों को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता है, जो कि अभी तक हासिल नहीं हो पाया है। अप्रैल में जब विशेष सत्र बुलाया गया था, तब सरकार को 298 वोट मिले थे, जबकि बिल पास कराने के लिए 360 सांसदों का समर्थन आवश्यक था। अब स्थिति में बदलाव आया है, लेकिन सरकार को अभी भी संख्या जुटाने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
महिला आरक्षण विधेयक को 2029 में लागू करने और लोकसभा सीटों की संख्या को 543 से बढ़ाकर 850 करने के लिए परिसीमन बिल की आवश्यकता है। इस बिल को पास कराने के लिए सरकार ने अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं। हालांकि, विपक्ष की संरचना में बदलाव के बावजूद, सरकार को अभी भी दो-तिहाई बहुमत जुटाने में कठिनाई हो रही है। संसद में विपक्षी दलों की मांगें भी बढ़ रही हैं, जिससे सरकार की स्थिति और भी जटिल हो गई है। पेपर लीक के मुद्दे पर छात्र आंदोलन ने भी सरकार की योजनाओं को प्रभावित किया है। इसके चलते संसद का सत्र हंगामे में बीत गया, और परिसीमन बिल को पेश नहीं किया जा सका।
















