Parliament discusses Agra Cantt incident: आगरा कैंट पर डिप्टी स्टेशन मैनेजर की पिटाई का मामला संसद में उठा

आगरा से एक महत्वपूर्ण समाचार सामने आया है, जहां कैंट रेलवे स्टेशन के डिप्टी स्टेशन मैनेजर (डीएसएम) नरेंद्र सिंह चाहर की पिटाई का मामला संसद में गूंजा। राज्यसभा
आगरा से एक महत्वपूर्ण समाचार सामने आया है, जहां कैंट रेलवे स्टेशन के डिप्टी स्टेशन मैनेजर (डीएसएम) नरेंद्र सिंह चाहर की पिटाई का मामला संसद में गूंजा। राज्यसभा सदस्य रामजी लाल सुमन ने 31 जुलाई को इस प्रकरण को उठाते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से 12 जुलाई को सुबह 11 बजे हुई घटना का जवाब मांगा। इस घटना में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के कर्मियों ने डीएसएम को स्टेशन पर 300 मीटर तक घसीटा था, जो कि रेलवे के कर्मचारियों के लिए एक गंभीर मुद्दा बन गया है। रेल मंत्री ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए बताया कि आरपीएफ के दो सब इंस्पेक्टर सहित चार जवानों को निलंबित किया गया है। इसके साथ ही, एक तीन सदस्यीय समिति इस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है। रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया कि रेलवे सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल को सौंपने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
घटना का विवरण बताते हुए रेल मंत्री ने कहा कि 12 जुलाई को हीराकुंड एक्सप्रेस कैंट रेलवे स्टेशन पर पहुंची थी। प्लेटफार्म नंबर एक पर महिला यात्री रंजीता सामान लेने के लिए उतरी थीं। इसी दौरान ग्रीन सिग्नल मिलने पर ट्रेन चल दी। रंजीता ने ट्रेन को पकड़ने के लिए दौड़ लगाई, जिसे देखकर डीएसएम नरेंद्र सिंह चाहर ने गार्ड से बात की और ट्रेन को रुकवाने का प्रयास किया। लेकिन आरपीएफ कर्मियों ने चेन पुलिंग के आरोप में रंजीता को पकड़ लिया और बिना रसीद के एक हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया। डीएसएम ने चेन पुलिंग के आरोप से इनकार किया और गार्ड द्वारा ट्रेन को रुकवाने की बात कही, जिसके बाद नाराज आरपीएफ कर्मियों ने उनकी पिटाई कर दी। यह घटना रेलवे कर्मचारियों के बीच एकजुटता का कारण बनी है।
राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाने के बाद रेल मंत्री ने कहा कि तीन सदस्यीय समिति पूरे मामले की जांच कर रही है और जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। समिति ने अब तक 24 अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए हैं, लेकिन महिला यात्री रंजीता का बयान अभी तक दर्ज नहीं किया गया है। समिति ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही रंजीता का बयान भी लिया जाएगा और इस माह के अंत तक जांच पूरी कर ली जाएगी। यह मामला न केवल रेलवे कर्मचारियों के लिए बल्कि आम यात्रियों के लिए भी सुरक्षा और अनुशासन के मुद्दों को उजागर करता है।
















