PoJK Unrest: अधिकार मांगने वालों का दमन, खौफनाक हालात में बेबस मां ने सुनाई पीड़ा

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में हालात बेहद चिंताजनक हैं। रावलकोट की रहने वाली अस्मा ने अपनी आंखों के सामने अपने 15 वर्षीय बेटे को खो दिया, जो प्रदर्श
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में हालात बेहद चिंताजनक हैं। रावलकोट की रहने वाली अस्मा ने अपनी आंखों के सामने अपने 15 वर्षीय बेटे को खो दिया, जो प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों की गोलीबारी का शिकार हुआ। अस्मा की पीड़ा उस दर्द को बयां करती है जो उन परिवारों के दिलों में है, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है। अस्मा कहती हैं, 'हमने तो बस सस्ता आटा, किफायती बिजली और बुनियादी सुविधाओं जैसे अधिकार ही मांगे थे, लेकिन इसके बदले हमें क्या मिला?' इस क्षेत्र में चुनाव और प्रदर्शनों के बीच तनाव का माहौल बना हुआ है। सुरक्षा बलों की अंधाधुंध गोलीबारी ने कई परिवारों के चिराग बुझा दिए हैं। बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, इंटरनेट सेवा बंद होने और सड़कों पर बैरिकेडिंग के कारण लोगों तक सही जानकारी पहुंचना मुश्किल हो गया है। अस्मा की तरह कई लोग अपने बेटों को खो चुके हैं, जैसे अयूब, जो एक पूर्व सैनिक हैं। उन्होंने कहा, 'मैंने जनरल जिया-उल-हक और जनरल परवेज मुशर्रफ के दौर में मार्शल लॉ देखा है, लेकिन अब जो हो रहा है, वह सबसे भयानक है। मेरे बेटे ने कुछ गलत नहीं किया था।'
अस्पतालों की स्थिति भी चिंताजनक है। डॉ. अनवर बताते हैं कि उनके पास केवल मामूली मरहम पट्टी का सामान है, जबकि पिछले कुछ हफ्तों में उन्होंने कई युवाओं का इलाज किया है, जिनके शरीर में गोलियों के घाव हैं। 90 प्रतिशत से अधिक मरीज इसी आयु वर्ग के हैं। खौफ इस कदर है कि लोग अस्पताल जाने से भी डरते हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि कहीं उन्हें गिरफ्तार न कर लिया जाए या गोली न मार दी जाए। इस बीच, बलूचिस्तान के नेता मीर यार बलूच और अन्य राष्ट्रवादी संगठनों ने 11 अगस्त को बलूचिस्तान का स्वतंत्रता दिवस मनाने की घोषणा की है। उनका कहना है कि 11 अगस्त 1947 को बलूचिस्तान ने ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता प्राप्त की थी, इसलिए वे इस दिन को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाएंगे।
















